विस्तृत उत्तर
महाभारत में सबसे घातक अस्त्र मुख्यतः दो दिनों में चले — 14वाँ दिन और 17वाँ दिन।
14वाँ दिन (सर्वाधिक दिव्यास्त्र) — इस दिन रात्रि युद्ध भी हुआ था जो असाधारण था। अर्जुन ने पाशुपतास्त्र से जयद्रथ का वध किया — यह महाभारत का सर्वाधिक नाटकीय प्रसंग है। अश्वत्थामा ने नारायणास्त्र चलाया जिसने पूरी पांडव सेना को भयभीत कर दिया। कर्ण ने वासवी शक्ति से घटोत्कच का वध किया। वायव्यास्त्र, इंद्रास्त्र भी चले। इस एक दिन में इतने दिव्यास्त्र चले जितने कि बाकी दिनों में मिलकर भी नहीं।
17वाँ दिन — कर्ण-अर्जुन का भीषण आमना-सामना। इस दिन अर्जुन ने अंजलिकास्त्र से कर्ण का वध किया। यह दिन भी अत्यंत घातक था क्योंकि कर्ण ने ब्रह्मास्त्र चलाने का प्रयास किया लेकिन श्राप के कारण भूल गए।
सौप्तिकपर्व — युद्ध के बाद ब्रह्मशिरास्त्र का प्रयोग जिसने परीक्षित को गर्भ में ही मार दिया था।
निष्कर्ष — 14वाँ दिन सबसे अधिक दिव्यास्त्रों का दिन था और 17वाँ दिन सबसे घातक व्यक्तिगत युद्ध का दिन।





