विस्तृत उत्तर
वाल्मीकि रामायण के बालकांड में महर्षि विश्वामित्र ने राम और लक्ष्मण को जो दिव्यास्त्र दिए, उनकी सूची अत्यंत विस्तृत है।
पहले विश्वामित्र ने बला और अतिबला नामक विद्याएं दीं जो ब्रह्मा की पुत्रियाँ हैं और जिनसे भूख-प्यास, थकान और नींद नहीं लगती। ताड़का वध के बाद उन्होंने निम्न दिव्यास्त्र दिए — पाँच दिव्य चक्र: दण्डचक्र, धर्मचक्र, कालचक्र, विष्णुचक्र और ऐन्द्रचक्र। वज्रास्त्र, शिव का शूल, ब्रह्मशिर, ब्रह्मास्त्र — ये प्रमुख महास्त्र थे। मोदकी व शिखर नामक गदाएं, नारायणास्त्र, आग्नेयास्त्र, वायव्यास्त्र, हयशिरास्त्र, क्रौंचास्त्र। धर्मपाश, कालपाश, वरुणपाश। खड्ग, मोहन, प्रस्वापन, प्रशमन, सौम्य, वर्षण, संतापन, विलापन, मादनास्त्र। गन्धर्वास्त्र, मानवास्त्र, पैशाचास्त्र, तामस, सौमनास्त्र।
इसके अतिरिक्त प्रजापति कृशाश्व के पुत्र माने जाने वाले 50 गुप्त दिव्यास्त्र भी दिए।
रावण वध में प्रयुक्त ब्रह्मास्त्र को अगस्त्य मुनि ने युद्धकाल में राम को दिया — यह मूलतः ब्रह्माजी ने रावण को दिया था और मंदोदरी के कक्ष में छिपाया था।





