विस्तृत उत्तर
प्रस्वापनास्त्र एक अत्यंत दुर्लभ और विशिष्ट दिव्यास्त्र था जो शत्रुओं में गहरी नींद उत्पन्न करने में सक्षम था।
प्रस्वापन' का अर्थ है — गहरी नींद लाना या चेतनाहीन कर देना। यह अस्त्र न तो शरीर को घायल करता था और न ही हत्या करता था — यह युद्धभूमि में शत्रु सेना को निद्रामग्न कर देता था। इस दृष्टि से यह एक बहुत अनूठे प्रकार का अस्त्र था।
भीष्म-परशुराम युद्ध में इसका महत्व — यह अत्यंत प्रसिद्ध प्रसंग है। जब परशुराम और भीष्म के बीच 23 दिनों का महायुद्ध हुआ तो दोनों एक-दूसरे के बराबर थे। एक समय परशुराम हावी हो गए और भीष्म रथ पर अचेत होकर गिर गए। तब भीष्म की माता गंगा और वसु देवताओं ने प्रकट होकर भीष्म को प्रस्वापनास्त्र का स्मरण कराया।
परशुराम के पास इस अस्त्र का कोई उत्तर या प्रतिकार नहीं था। यह जान लेने पर, अपने पितरों और ऋषियों के अनुरोध पर परशुराम ने स्वयं को युद्ध से विरत किया और माना कि इस युद्ध में निर्णय नहीं होगा।
इस अस्त्र की विशेष बात यह थी कि यह अत्यंत दुर्लभ था — एकमात्र भीष्म के पास था और परशुराम जैसे महायोद्धा के पास भी इसका उत्तर नहीं था।





