विस्तृत उत्तर
द्रोणाचार्य महाभारत काल के सर्वश्रेष्ठ अस्त्र-शस्त्र आचार्यों में से एक थे। उनके पास जो अस्त्र भंडार था वह अद्वितीय था।
ज्ञान का स्रोत — द्रोणाचार्य ने महेंद्र पर्वत पर भगवान परशुराम के पास जाकर संपूर्ण अस्त्र-शस्त्र विद्या प्राप्त की थी। परशुराम उस समय अपनी समस्त विद्याएं ब्राह्मणों को दान कर रहे थे। द्रोण ने कहा — 'मुझे आपके सभी अस्त्र-शस्त्र उनके संहार-मंत्रों सहित चाहिए।' परशुराम ने 'एवमस्तु' कहा।
प्रमुख अस्त्र — ब्रह्मास्त्र: परशुराम से प्राप्त, जो उन्होंने अर्जुन, अश्वत्थामा और युधिष्ठिर को दिया। ब्रह्मशिरास्त्र: यह भी उनके पास था जो अश्वत्थामा को मिला। नारायणास्त्र: भगवान नारायण की उपासना से प्राप्त, जो अश्वत्थामा को दिया। प्रस्वापनास्त्र: नींद लाने वाला अस्त्र। आग्नेयास्त्र, वायव्यास्त्र, वरुणास्त्र आदि।
विशेष उल्लेख — द्रोणाचार्य के पास आंगिरस धनुष था जो उन्होंने महर्षि अंगिरस से प्राप्त किया था। कुरुक्षेत्र युद्ध में द्रोण सेनापति रहते हुए अपार पराक्रम दिखाया — जब तक वे सक्रिय रहे, पांडव सेना उनका सामना नहीं कर सकी।





