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परशुराम से जुड़े सभी प्रश्न(25)

परशुराम पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 25 प्रश्न उपलब्ध हैं।

दिव्यास्त्र

वैष्णवास्त्र किन-किन के पास था?

वैष्णवास्त्र श्री राम, मेघनाद, परशुराम, भगदत्त (नरकासुर पुत्र) और प्रद्युम्न (कृष्ण पुत्र) के पास था।

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दिव्यास्त्र

भार्गवास्त्र और इंद्रास्त्र में क्या संबंध है?

भार्गवास्त्र को इंद्रास्त्र का उन्नत और अधिक शक्तिशाली संस्करण माना जाता है जिसे परशुराम ने निर्मित किया था।

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अस्त्र शस्त्र

द्रोणाचार्य के पास कौन-कौन से अस्त्र थे?

द्रोणाचार्य के पास परशुराम से प्राप्त संपूर्ण अस्त्र-शस्त्र ज्ञान था — ब्रह्मास्त्र, ब्रह्मशिरास्त्र, नारायणास्त्र, प्रस्वापनास्त्र, आंगिरस धनुष सहित सभी प्रमुख दिव्यास्त्र।

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दिव्यास्त्र

भार्गवास्त्र किसने बनाया था

भार्गवास्त्र भगवान परशुराम (भार्गव) की अस्त्र-सिद्धि से उत्पन्न उनका अपना विशिष्ट दिव्यास्त्र है। यह उनके वंश-नाम 'भार्गव' पर आधारित है। शिव की शिक्षा और अपनी तपस्या से यह अस्त्र सिद्ध किया गया।

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दिव्यास्त्र

भार्गवास्त्र क्या है

भार्गवास्त्र परशुराम (भृगु-वंशज/भार्गव) का विनाशकारी दिव्यास्त्र है जो एक साथ अनेक विध्वंसक अस्त्रों की वर्षा करता है। कर्ण ने इससे पांडव सेना की पूरी अक्षौहिणी नष्ट कर दी थी।

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दिव्यास्त्र

परशुराम ने कृष्ण को सुदर्शन चक्र क्यों दिया

परशुराम ने कृष्ण को सुदर्शन इसलिए दिया क्योंकि श्रीकृष्ण विष्णु के पूर्ण अवतार थे और यह चक्र मूलतः विष्णु का ही था। द्वापर में अधर्म-नाश के लिए इस चक्र का सही उत्तराधिकारी कृष्ण थे।

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दिव्यास्त्र

परशुराम ने सुदर्शन चक्र कैसे प्राप्त किया

सुदर्शन चक्र शिव → विष्णु → पार्वती → अग्नि → वरुण की परंपरा से परशुराम को मिला। परशुराम भगवान विष्णु के अवतार हैं इसलिए यह चक्र उनके पास धरोहर के रूप में था।

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अस्त्र शस्त्र

परशुराम के फरसे का नाम क्या है?

परशुराम के फरसे का नाम 'परशु' है, और शास्त्रों में इसे 'विद्युदभि' भी कहा जाता है। यह शिव-प्रदत्त दिव्य फरसा था जिसके कारण वे 'परशुराम' कहलाए।

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दिव्यास्त्र

भीष्म ने परशुराम पर आग्नेयास्त्र चलाया तो क्या हुआ?

भीष्म ने परशुराम पर आग्नेयास्त्र चलाया था लेकिन परशुराम ने वरुणास्त्र से उसे शांत कर दिया। यह गुरु-शिष्य के बीच दिव्यास्त्र द्वंद्व का उदाहरण है।

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दिव्यास्त्र

कर्ण को वरुणास्त्र कैसे मिला?

कर्ण को वरुणास्त्र कुछ मतों के अनुसार परशुराम से मिला था जबकि अन्य मतों के अनुसार विभिन्न यक्षों, राक्षसों और देवों से भी उन्होंने अस्त्र प्राप्त किए थे।

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दिव्यास्त्र

पाशुपतास्त्र किन-किन के पास था?

पाशुपतास्त्र भगवान शिव के अलावा केवल चार महापुरुषों के पास था — अर्जुन, मेघनाद (इंद्रजीत), परशुराम और विश्वामित्र।

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शिव अस्त्र-शस्त्र

शिव का फरसा परशुराम को कैसे मिला

परशुराम ने शिव की घोर तपस्या की। शिव ने प्रसन्न होकर धर्म-रक्षा के लिए दिव्य परशु (फरसा) दिया और उसे उठाने की शक्ति भी प्रदान की। इसी से वे 'परशुराम' कहलाए।

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अस्त्र शस्त्र

विजय धनुष कर्ण को किसने दिया था?

विजय धनुष परशुराम ने कर्ण को दिया था — शाप के बाद दया में। आशीर्वाद था कि जब तक यह हाथ में रहे, कोई नहीं जीत सकता। इसीलिए कर्ण के हाथ से विजय छूटने पर ही उसका वध संभव हुआ।

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अस्त्र शस्त्र

कर्ण के धनुष का नाम क्या था?

कर्ण के धनुष का नाम 'विजय' था जिसे परशुराम ने उसे दिया था। यह अखंड था, पाशुपतास्त्र से भी इसका घेरा नहीं टूटता था। यह धनुष न होने पर ही कर्ण का वध हो सका।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

'भार्गव' और 'रेणुकासुत' कौन हैं?

परशुरामजी — भार्गव (भृगु वंश से) और रेणुकासुत (माता रेणुका के पुत्र)। पिता जमदग्नि ऋषि। शिवजी से फरसा (परशु) मिला — इसलिये 'परशुराम'।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

'बहु धनुही तोरी लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं' — किसने कहा?

लक्ष्मणजी ने परशुरामजी से कहा — बचपन में बहुत धनुष तोड़े, कभी ऐसा क्रोध नहीं हुआ। प्रसिद्ध व्यंग्य — शिवजी के दिव्य धनुष को 'धनुही' (साधारण छोटा धनुष) कहा।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

परशुरामजी ने अपना वैष्णव धनुष किसे दिया?

श्रीरामजी को — 'राम रमापति कर धनु लेहू। खेंचहु मिटै मोर संदेहू।' धनुष देने लगे तो वह स्वयं रामजी के पास चला गया — इससे परशुरामजी को निश्चय हुआ कि ये साक्षात् विष्णु हैं।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

परशुरामजी ने किन-किन क्षत्रियों/राजाओं को पहले मारा था?

इक्कीस बार पृथ्वी क्षत्रियविहीन की। सहस्रबाहु (हज़ार भुजाओं वाला) को भी मारा। पिता जमदग्नि की हत्या का प्रतिशोध। 'बिस्व बिदित छत्रिय कुल द्रोही' — संसार जानता है मैं क्षत्रिय कुल का शत्रु हूँ।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

परशुरामजी ने अन्त में श्रीरामजी को कैसे पहचाना?

रामजी के मृदु-गूढ़ वचनों से बुद्धि के परदे खुले। फिर रामजी ने विष्णु धनुष लेकर खींचा — तब परशुरामजी ने प्रभाव जाना। पुलकित होकर हाथ जोड़कर बोले — 'जय रघुबंस बनज बन भानू!' — परब्रह्म पहचानकर प्रणाम किया।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

लक्ष्मणजी ने परशुरामजी के फरसे (परशु) के बारे में क्या कहा?

लक्ष्मणजी ने निर्भीकता से कहा — 'बहु धनुही तोरी लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं' — बचपन में बहुत धनुष तोड़े, कभी ऐसा क्रोध नहीं हुआ। फरसे से नहीं डरे — हम क्षत्रिय हैं, युद्ध से भय नहीं।

#बालकाण्ड#लक्ष्मण#परशुराम
रामचरितमानस — बालकाण्ड

परशुरामजी कौन हैं — किसके अवतार?

भगवान विष्णु के अवतार — जमदग्नि ऋषि और रेणुका के पुत्र। भार्गव (भृगुवंशी), रेणुकासुत। 21 बार पृथ्वी क्षत्रियविहीन की। शिवजी के परम भक्त, शिवजी से फरसा (परशु) मिला। अन्त में रामजी को परब्रह्म पहचानकर प्रणाम किया।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

धनुष भंग की ध्वनि सुनकर कौन क्रोधित होकर आये?

परशुरामजी (भार्गव/रेणुकासुत) — शिवजी के परम भक्त और विष्णु अवतार। उन्हें लगा कि शिवजी के धनुष का अपमान हुआ। क्रोधित होकर सभा में आये — 'किसने शिवजी का धनुष तोड़ा?' इसके बाद प्रसिद्ध परशुराम-लक्ष्मण संवाद।

#बालकाण्ड#परशुराम#धनुष भंग
अस्त्र शस्त्र

परशुराम को फरसा शिव जी से कैसे मिला?

परशुराम ने कैलाश पर भगवान शिव की घोर तपस्या की। प्रसन्न शिव ने उन्हें दिव्य परशु (विद्युदभि फरसा) सहित अनेक अस्त्र दिए। इसी परशु के कारण 'राम' का नाम 'परशुराम' हो गया।

#परशुराम#शिव तपस्या#परशु प्राप्ति
अस्त्र शस्त्र

कर्ण के विजय धनुष की क्या विशेषता थी?

विजय धनुष अखंड और अभेद्य था। इससे चलाने वाले के चारों ओर सुरक्षा-घेरा बनता था जो पाशुपतास्त्र भी नहीं भेद सकता। इस धनुष को हाथ से छोड़ने पर ही कर्ण का वध संभव हुआ।

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विष्णु अस्त्र शस्त्र

कृष्ण को सुदर्शन चक्र किसने दिया?

कृष्ण विष्णु के अवतार हैं अतः यह चक्र उनका ही है। महाभारत में खांडव दहन के बदले अग्निदेव ने कृष्ण को चक्र और गदा दी। एक अन्य परंपरा में परशुराम से प्राप्त होने का उल्लेख है।

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