विस्तृत उत्तर
परशुरामजी भगवान विष्णु के अवतार हैं। वे जमदग्नि ऋषि और माता रेणुका के पुत्र थे — इसलिये उन्हें 'भार्गव' (भृगुवंशी) और 'रेणुकासुत' (रेणुका के पुत्र) भी कहते हैं।
परशुरामजी ने इक्कीस बार पृथ्वी को क्षत्रियों से विहीन किया था। वे शिवजी के परम भक्त और महान योद्धा थे। उनके हाथ में फरसा (परशु) था जो शिवजी ने उन्हें दिया था — इसीलिये वे 'परशुराम' (परशु + राम) कहलाये।
बालकाण्ड में परशुरामजी का प्रसंग धनुष भंग के बाद आता है — वे क्रोधित होकर सभा में आये और लक्ष्मणजी से तीखा वाद-विवाद हुआ। अन्त में उन्होंने श्रीरामजी को परब्रह्म पहचानकर प्रणाम किया।





