विस्तृत उत्तर
गुरु चरणों की रज को नेत्र का अंजन (काजल) और अमृत-मूल-चूर्ण कहा — 'गुरु पद रज मृदु मंजुल अंजन। नयन लाइ देखिअ मन मंजन' — गुरु चरण-धूलि नेत्रों में लगाकर मन शुद्ध करो। जिसे लगाने से ज्ञान-दृष्टि मिले और माया का अन्धकार दूर हो।
नेत्र का अंजन (काजल) और अमृत-मूल-चूर्ण — 'गुरु पद रज मृदु मंजुल अंजन। नयन लाइ देखिअ मन मंजन' — ज्ञान-दृष्टि देने वाला।
गुरु चरणों की रज को नेत्र का अंजन (काजल) और अमृत-मूल-चूर्ण कहा — 'गुरु पद रज मृदु मंजुल अंजन। नयन लाइ देखिअ मन मंजन' — गुरु चरण-धूलि नेत्रों में लगाकर मन शुद्ध करो। जिसे लगाने से ज्ञान-दृष्टि मिले और माया का अन्धकार दूर हो।
इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ
पौराणिक पर आपको रामचरितमानस — बालकाण्ड से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।