विस्तृत उत्तर
अहल्या का उद्धार गौतम ऋषि के आश्रम में हुआ — जो विश्वामित्रजी के यज्ञ स्थान से जनकपुर जाने के मार्ग में पड़ता था।
चौपाई — 'आश्रम एक दीख मग माहीं। खग मृग जीव जंतु तहँ नाहीं। पूछा मुनिहि सिला प्रभु देखी। सकल कथा मुनि कहा बिसेषी' — मार्ग में एक आश्रम दिखा, वहाँ कोई पशु-पक्षी नहीं था। एक शिला देखकर रामजी ने पूछा, मुनि ने विस्तार से कथा सुनाई।
रामजी के पवित्र चरणों के स्पर्श से शिला से अहल्या प्रकट हुईं — 'परसत पद पावन सोक नसावन प्रगट भई तपपुंज सही।'



