विस्तृत उत्तर
सत्संग = सबसे बड़ा साधन। शिक्षाएँ: (1) 'बिनु सतसंग बिबेक न होई' — विवेक नहीं, (2) पारस समान — लोहे को सोना बनाये, (3) मोह-काम-क्रोध नष्ट हों, (4) संत-समाज = चलता-फिरता तीर्थराज, (5) सत्संग रामकृपा से मिलता — पहले राम-भक्ति करो।
सबसे बड़ा साधन — विवेक देता, मोह नष्ट करता, तीर्थराज समान। 'बिनु सतसंग बिबेक न होई। राम कृपा बिनु सुलभ न सोई।'
सत्संग = सबसे बड़ा साधन। शिक्षाएँ: (1) 'बिनु सतसंग बिबेक न होई' — विवेक नहीं, (2) पारस समान — लोहे को सोना बनाये, (3) मोह-काम-क्रोध नष्ट हों, (4) संत-समाज = चलता-फिरता तीर्थराज, (5) सत्संग रामकृपा से मिलता — पहले राम-भक्ति करो।
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