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विस्तृत उत्तर
कामदेव ने देवताओं के कहने पर शिवजी की अखण्ड समाधि भंग करने का प्रयास किया — वसन्त प्रकट की, पंचबाण छोड़े, समाधि टूटी। शिवजी ने क्रोधित होकर तीसरा नेत्र खोला — 'चितवत कामु भयउ जरि छारा' — देखते ही कामदेव भस्म। कारण — दिव्य तपस्या में विघ्न डालना अपराध।
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