विस्तृत उत्तर
नारदजी को काम-विजय का अभिमान था। भगवान ने अभिमान तोड़ने को माया रची — विश्वमोहिनी स्वयंवर में वानर-मुख दिया, राजकुमारी ने छोड़ा, शिवगणों ने हँसी उड़ाई। अपमानित-क्रोधित नारदजी ने शाप दिया — मनुष्य जन्म लो, स्त्री-विरह सहो। कारण — भगवान ने जानबूझकर उपहास कराया (ऐसा नारदजी ने समझा)।





