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रामचरितमानस — बालकाण्ड प्रश्नोत्तर — 320 प्रश्न

रामचरितमानस — बालकाण्ड से जुड़े 320 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 320 प्रश्न

'मंगल करनि कलि मल हरनि तुलसी कथा रघुनाथ की' — इसका अर्थ?

रघुनाथजी की कथा = मंगलकारी + कलियुग के पाप नष्ट करने वाली। बालकाण्ड समापन का छन्द। रामकथा ही कलियुग का सबसे बड़ा साधन।

बालकाण्डमंगल करनिरघुनाथ कथा
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'ढोल गँवार शूद्र पशु नारी। सकल ताड़ना के अधिकारी' — यह चौपाई बालकाण्ड में है या नहीं?

नहीं — बालकाण्ड में नहीं, सुन्दरकाण्ड में है। समुद्र के वचन हैं, भगवान या तुलसीदासजी के नहीं। सन्दर्भ समझना आवश्यक।

बालकाण्डढोल गँवारस्पष्टीकरण
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'एक अनीह अरूप अनामा। अज सच्चिदानंद परधामा' — किसका वर्णन?

परब्रह्म/निर्गुण ब्रह्म — अद्वितीय, इच्छारहित, रूपरहित, नामरहित, अजन्मा, सच्चिदानन्द, परम धाम। वही ब्रह्म रामजी के रूप में अवतार लेते हैं।

बालकाण्डसच्चिदानंदब्रह्म
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'होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा' — अर्थ?

जो राम ने रचा वही होगा, तर्क से क्या? शिवजी ने सतीजी को कहा। शिक्षा — ईश्वर की योजना सर्वोपरि।

बालकाण्डराम रचि राखाभाग्य
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'सीय राममय सब जग जानी। करउँ प्रनाम जोरि जुग पानी' — किसने कहा और अर्थ?

तुलसीदासजी — मंगलाचरण। सम्पूर्ण जगत सीताराममय जानकर प्रणाम। सबसे प्रसिद्ध दोहा।

बालकाण्डसीय राममयतुलसीदास
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विनम्रता की शिक्षा — श्रीरामजी के चरित्र से?

सर्वशक्तिमान पर सबसे विनम्र — गुरु को प्रणाम, परशुराम से मृदु वाणी, माता की आज्ञा मानी। शिक्षा — सच्ची शक्ति विनम्रता में।

बालकाण्डविनम्रताराम
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कपट का परिणाम — प्रतापभानु कथा से शिक्षा?

कपटमुनि के जाल में फँसे, ब्राह्मण अपमान, शाप — राक्षस बने। शिक्षा — बुरी संगति = विनाश, अज्ञानतावश पाप भी फलता।

बालकाण्डकपटप्रतापभानु
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तपस्या और दृढ़ संकल्प की शिक्षा — पार्वती प्रसंग से?

'जन्म कोटि लगि रगर हमारी' — करोड़ जन्म हठ, सप्तर्षियों की परीक्षा में अडिग। शिक्षा — दृढ़ संकल्प से असम्भव भी सम्भव।

बालकाण्डतपस्यादृढ़ संकल्प
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अभिमान का परिणाम — नारद प्रसंग से शिक्षा?

नारद — अभिमान किया, वानर-मुख मिला, अपमान, शाप दिया, पश्चाताप। शिक्षा — अभिमान सबसे बड़ा शत्रु, सब उपलब्धि ईश्वर कृपा।

बालकाण्डअभिमाननारद
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गुरु के चरणों की रज की तुलना किससे की गई बालकाण्ड में?

नेत्र का अंजन (काजल) और अमृत-मूल-चूर्ण — 'गुरु पद रज मृदु मंजुल अंजन। नयन लाइ देखिअ मन मंजन' — ज्ञान-दृष्टि देने वाला।

बालकाण्डगुरु चरण रजअंजन
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तुलसीदासजी ने सत्संग की तुलना पारस पत्थर से क्यों की?

पारस लोहे को सोना बनाता — वैसे सत्संग अज्ञानी को ज्ञानी। 'बिनु सतसंग बिबेक न होई' — सत्संग बिना विवेक नहीं।

बालकाण्डसत्संगपारस
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नारदजी ने भगवान विष्णु को शाप क्यों दिया?

अभिमान तोड़ने को भगवान ने वानर-मुख दिया, स्वयंवर में अपमान, शिवगणों ने हँसी उड़ाई — क्रोध में शाप दिया। कारण — उपहास का अपमान।

बालकाण्डनारद शाप कारणअपमान
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कामदेव को शिवजी ने भस्म क्यों किया?

कामदेव ने पंचबाण छोड़कर शिवजी की अखण्ड समाधि भंग की — तीसरा नेत्र खोलकर भस्म किया। कारण — दिव्य तपस्या में विघ्न अपराध।

बालकाण्डकामदहन कारणशिव
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राजा जनक ने सीता विवाह में धनुष-शर्त क्यों रखी?

सीताजी बचपन में शिवजी का धनुष खेल-खेल में उठातीं — जनक ने सोचा योग्य वर वही जो तोड़ सके। भूमिजा सीता के लिये दिव्य वर चाहिये।

बालकाण्डजनक शर्तधनुष
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भगवान राम ने मनुष्य रूप में अवतार क्यों लिया — सबसे सरल उत्तर?

'बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार' — ब्राह्मण, गौ, देवता, संतों की रक्षा। कारण अनन्त हैं।

बालकाण्डअवतार कारणसरल उत्तर
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बालकाण्ड में सबसे पहले कौन सी कथा आती है — शिव-सती या पार्वती जन्म?

शिव-सती कथा पहले — पार्वती जन्म बाद में। क्रम: मंगलाचरण → नाम महिमा → याज्ञवल्क्य-भरद्वाज → शिव-सती → दक्ष यज्ञ → सती देहत्याग → पार्वती जन्म → तपस्या → शिव-पार्वती विवाह → रामावतार कारण → राम जन्म।

बालकाण्डकथा क्रमशिव सती
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अहल्या का उद्धार कहाँ हुआ?

गौतम ऋषि के आश्रम में — विश्वामित्र यज्ञ से जनकपुर जाते मार्ग में। शिला देखकर मुनि ने कथा सुनाई, रामजी के चरण-स्पर्श से अहल्या प्रकट हुईं।

बालकाण्डअहल्या उद्धार स्थानगौतम आश्रम
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सीता-राम विवाह कहाँ हुआ?

जनकपुर (मिथिला) के भव्य विवाह-मण्डप में। चारों भाइयों का विवाह एक मण्डप में वेदविधि से। 'जसि बिबाह कै बिधि श्रुति गाई। महामुनिन्ह सो सब करवाई।'

बालकाण्डविवाह स्थानजनकपुर
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धनुष-भंग कहाँ हुआ?

जनकपुर (मिथिला) की रंगभूमि (यज्ञशाला/सभा-मण्डप) में। जनक ने विवाह-यज्ञ की रंगभूमि सजवाई, वहीं शिवजी का धनुष रखा, वहीं रामजी ने तोड़ा।

बालकाण्डधनुष भंग स्थानजनकपुर
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सीता-राम का प्रथम मिलन कहाँ हुआ?

जनकपुर की पुष्पवाटिका (राजकीय बाग) में। रामजी फूल लेने आये, सीताजी गिरिजा पूजन के लिये। 'सिय मुख ससि भए नयन चकोरा' — दोनों ने एक-दूसरे को पहली बार देखा।

बालकाण्डप्रथम मिलन स्थानपुष्पवाटिका
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रामचरितमानस की रचना कहाँ शुरू हुई?

अयोध्या में — 'अवधपुरीं यह चरित प्रकासा।' कुछ भाग काशी में भी लिखा। अन्त में काशी में भगवान विश्वनाथ के समक्ष समर्पित।

बालकाण्डरचना स्थानअयोध्या
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'त्रिपुरारि' और 'उमापति' कौन हैं?

शिवजी — त्रिपुरारि (त्रिपुर का नाश करने वाले) और उमापति (उमा/पार्वती के पति)। अन्य नाम — महेश, शम्भु, शंकर, वृषकेतु, चन्द्रमौलि, पुरारि।

बालकाण्डत्रिपुरारिउमापति
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'गिरिजा' कौन हैं?

पार्वतीजी — गिरि (पर्वत/हिमवान) की पुत्री। 'सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए।' अन्य नाम — उमा, भवानी, अम्बिका, गौरी, शैलकुमारी, अपर्णा।

बालकाण्डगिरिजापार्वती
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'भार्गव' और 'रेणुकासुत' कौन हैं?

परशुरामजी — भार्गव (भृगु वंश से) और रेणुकासुत (माता रेणुका के पुत्र)। पिता जमदग्नि ऋषि। शिवजी से फरसा (परशु) मिला — इसलिये 'परशुराम'।

बालकाण्डभार्गवरेणुकासुत
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'कौसिक' और 'गाधिसुत' कौन हैं?

विश्वामित्रजी — कौसिक (कुशिक वंश से) और गाधिसुत (गाधि राजा के पुत्र)। 'गाधिसूनु सब कथा सुनाई' — गाधि के पुत्र विश्वामित्रजी ने कथा सुनाई। पहले क्षत्रिय, तपस्या से ब्रह्मर्षि बने।

बालकाण्डकौसिकगाधिसुत
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'भानुकुलभूषण' किसे कहा गया?

श्रीरामजी — सूर्यवंश (भानुकुल) के भूषण (आभूषण)। 'देखि भानुकुलभूषनहि बिसरा सखिन्ह अपान।' राम रघुवंश (सूर्यवंश) के राजकुमार — इसलिये 'भानुकुलभूषण', 'रघुकुलतिलक', 'रघुवर'।

बालकाण्डभानुकुलभूषणराम
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'मिथिलेश' कौन हैं?

राजा जनक — मिथिला (जनकपुर) के राजा। मिथिला + ईश = मिथिलेश। अन्य नाम — विदेह, जनक, सीरध्वज। बालकाण्ड में — 'बेगि बिदेह नगर निअराया।'

बालकाण्डमिथिलेशजनक
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'वैदेही' नाम क्यों पड़ा?

विदेह (जनक) कुल में उत्पन्न — विदेह + ई = वैदेही (विदेह कुल की कन्या)। जनक वंश को 'विदेह वंश' कहते हैं क्योंकि राजा देह-भाव से परे (विरक्त) रहते थे।

बालकाण्डवैदेहीसीता
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'जानकी' नाम क्यों पड़ा?

सीताजी राजा जनक की पुत्री हैं — जनक + ई = जानकी (जनक की कन्या)। बालकाण्ड में — 'जोगु जानकिहि यह बरु अहई।' सबसे प्रचलित नाम। रामजी को 'जानकीनाथ/जानकीवल्लभ' कहते हैं।

बालकाण्डजानकीसीता नाम
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'विदेहकुमारी' कौन हैं?

सीताजी — राजा जनक (विदेह) की पुत्री। जनक को 'विदेह' कहते हैं (देह-भाव से परे)। सीताजी के अन्य नाम — जानकी, वैदेही, सीता, जनकसुता, भूमिजा।

बालकाण्डविदेहकुमारीसीता
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'कृपासिंधु' किसे कहा गया है बालकाण्ड में?

मुख्यतः भगवान श्रीरामजी को — 'कृपासिंधु बोले मृदु बचना।' कई स्थानों पर शिवजी और विष्णुजी को भी। पर सर्वाधिक बार यह रामजी की उपाधि है — कृपा का समुद्र।

बालकाण्डकृपासिंधुराम
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रामचरितमानस में कथा-वक्ता और श्रोता की प्रथम (मुख्य) जोड़ी कौन है?

शिवजी (वक्ता) और पार्वतीजी (श्रोता) — मुख्य कथा-संवाद। 'सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए' — शिवजी ने कैलास पर पार्वतीजी को रामकथा सुनाई। यह मूल कथा-धारा है।

बालकाण्डशिव पार्वतीप्रथम संवाद
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गोस्वामी तुलसीदासजी के गुरु कौन थे?

बाबा नरहरिदास (नरहर्यानन्द) — कुछ परम्पराओं में नरसिंहदास। मानस में गुरु महिमा — 'बंदउँ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि' — गुरु कृपा के समुद्र और नररूप हरि हैं।

बालकाण्डतुलसीदास गुरुनरहरिदास
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रामचरितमानस का सबसे छोटा काण्ड कौन सा है?

किष्किन्धाकाण्ड (~30 दोहे) — सबसे छोटा। बालकाण्ड (~361 दोहे) सबसे बड़ा। अरण्यकाण्ड (~46) भी छोटे काण्डों में।

बालकाण्डसबसे छोटा काण्डकिष्किन्धाकाण्ड
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रामचरितमानस में कथा-वक्ता और श्रोता की कितनी जोड़ियाँ हैं?

चार जोड़ियाँ (चार घाट) — (1) शिव-पार्वती, (2) काकभुशुण्डि-गरुड़, (3) याज्ञवल्क्य-भरद्वाज, (4) तुलसीदास-संत। 'सुठि सुंदर संबाद बर बिरचे बुद्धि बिचारि। तेइ एहि पावन सुभग सर घाट मनोहर चारि॥'

बालकाण्डचार संवादकथा जोड़ियाँ
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रामचरितमानस में मुख्य छन्द कौन से हैं?

मुख्य छन्द — (1) चौपाई (सर्वाधिक, कथा वाहक), (2) दोहा (सार-संक्षेप), (3) सोरठा (दोहे का उल्टा), (4) छन्द (विशेष अवसरों पर, गेय), (5) श्लोक (संस्कृत, मंगलाचरण)। चौपाई-दोहा मिलकर कथा चलती है।

बालकाण्डछन्द प्रकारचौपाई
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रामचरितमानस की टीका (गीता प्रेस संस्करण) किसने लिखी?

श्री हनुमानप्रसाद पोद्दारजी ने — गीता प्रेस गोरखपुर के संस्थापक-सम्पादक। यह 'सटीक' संस्करण है जिसमें मूल पाठ के नीचे हिन्दी अर्थ-व्याख्या है। इसी टीका से सभी उत्तर सत्यापित।

बालकाण्डगीता प्रेसहनुमानप्रसाद पोद्दार
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रामचरितमानस किसने लिखी?

गोस्वामी तुलसीदासजी ने — 'रामचरितमानस कबि तुलसी।' संवत् 1631-1633 (1574-1576 ई.) में रचना। अयोध्या में शुरू, काशी में समर्पित। हिन्दी साहित्य के महानतम कवि।

बालकाण्डतुलसीदासरचनाकार
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बालकाण्ड रामचरितमानस का सबसे बड़ा काण्ड है — सही या गलत?

सही — बालकाण्ड सबसे बड़ा काण्ड है। गीता प्रेस संस्करण में पृष्ठ 17-340 (~323 पृष्ठ)। ~361 दोहे + सैकड़ों चौपाइयाँ। मंगलाचरण से लेकर विवाह-अयोध्या वापसी तक सब शामिल।

बालकाण्डसबसे बड़ा काण्डसंरचना
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रामचरितमानस के सात काण्डों के नाम क्या हैं?

(1) बालकाण्ड, (2) अयोध्याकाण्ड, (3) अरण्यकाण्ड, (4) किष्किन्धाकाण्ड, (5) सुन्दरकाण्ड, (6) लंकाकाण्ड, (7) उत्तरकाण्ड। 'सप्त प्रबंध सुभग सोपाना' — मानस सरोवर की सात सुन्दर सीढ़ियाँ।

बालकाण्डसात काण्ड नामसोपान
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रामचरितमानस में कुल कितने काण्ड हैं?

सात काण्ड — बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, लंकाकाण्ड, उत्तरकाण्ड। 'सप्त प्रबंध सुभग सोपाना' — सात सोपान (सीढ़ियाँ) मानस सरोवर की।

बालकाण्डसात काण्डसंरचना
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सीता-राम विवाह तय होने पर राजा जनक ने किसे दूत बनाकर भेजा?

विशिष्ट नाम मानस में नहीं — जनक ने विश्वामित्रजी की सलाह पर दूत भेजे। दूतों ने दशरथ को सब समाचार सुनाये — धनुष भंग, जयमाला, बारात का निमन्त्रण। दशरथ प्रसन्न हुए, बारात की तैयारी शुरू।

बालकाण्डदूतजनक
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'जसि रघुबीर ब्याह बिधि बरनी। सकल कुअँर ब्याहे तेहिं करनी' — इसका अर्थ?

अर्थ — रामजी के विवाह की जो विधि बताई, उसी रीति से सब राजकुमार (भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न) भी विवाहे गये। चारों विवाह एक ही वेदविधि, एक मण्डप, एक अवसर पर। दहेज से मण्डप सोने-मणियों से भरा।

बालकाण्डचौपाई अर्थचारों विवाह
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राजा जनक और राजा दशरथ का मिलन कैसा था?

अत्यन्त प्रेमपूर्ण — जनक ने भव्य स्वागत किया, प्रेम से गले लगे। 'इन्ह कै प्रीति परसपर पावनि। कहि न जाइ मन भाव सुहावनि' — पवित्र प्रीति वाणी से कही नहीं जा सकती। जनक ने कहा — ब्रह्म-जीव जैसा स्वाभाविक प्रेम।

बालकाण्डजनक दशरथ मिलनप्रेम
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रामचरितमानस — बालकाण्ड — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर रामचरितमानस — बालकाण्ड श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड को गहराई से समझने का तरीका

रामचरितमानस — बालकाण्ड प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

320 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।