विस्तृत उत्तर
रामचरितमानस गोस्वामी तुलसीदासजी ने लिखी।
बालकाण्ड में तुलसीदासजी ने स्वयं कहा — 'संभु प्रसाद सुमति हियँ हुलसी। रामचरितमानस कबि तुलसी' — श्रीशिवजीकी कृपासे उसके हृदयमें सुन्दर बुद्धिका विकास हुआ, जिससे यह तुलसीदास श्रीरामचरितमानसका कवि हुआ।
तुलसीदासजी (सम्वत् 1554-1680 विक्रमी / 1497-1623 ई.) हिन्दी साहित्य के महानतम कवियों में से एक हैं। उन्होंने रामचरितमानस की रचना संवत् 1631 में शुरू की और 1633 में पूरी की — अयोध्या में शुरू, काशी में समर्पित।





