विस्तृत उत्तर
इस चौपाई में विक्रम संवत् 1631 है।
'सोरह सै' = सोलह सौ = 1600
'एकतीसा' = इकतीस = 31
कुल = 1631 विक्रम संवत् (1574 ईस्वी)
पूरी चौपाई — 'संबत सोरह सै एकतीसा। करउँ कथा हरि पद धरि सीसा॥'
इसका अर्थ — संवत् 1631 में श्रीहरिके चरणोंपर सिर रखकर मैं इस कथाका आरम्भ करता हूँ।
इसके ठीक बाद तुलसीदासजी ने रचना स्थान और तिथि भी बताई — 'नौमी भौम बार मधुमासा। अवधपुरीं यह चरित प्रकासा॥' अर्थात् चैत्र मास (मधुमास) की नवमी तिथि, मंगलवार (भौम बार) को अयोध्यापुरी (अवधपुरी) में यह चरित्र प्रकाशित हुआ।
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