विस्तृत उत्तर
धनुष-भंग जनकपुर (मिथिला) की रंगभूमि (यज्ञशाला/सभा-मण्डप) में हुआ।
जनक ने विवाह-यज्ञ के लिये रंगभूमि सजवाई जहाँ शिवजी का धनुष रखा गया। हज़ारों राजा आये, सभी ने धनुष उठाने का प्रयास किया पर असफल रहे। विश्वामित्रजी की आज्ञा पर रामजी ने उसी रंगभूमि में सहजता से धनुष उठाकर तोड़ दिया।





