रामचरितमानस — बालकाण्डसीता-राम विवाह कहाँ हुआ?जनकपुर (मिथिला) के भव्य विवाह-मण्डप में। चारों भाइयों का विवाह एक मण्डप में वेदविधि से। 'जसि बिबाह कै बिधि श्रुति गाई। महामुनिन्ह सो सब करवाई।'#बालकाण्ड#विवाह स्थान#जनकपुर
रामचरितमानस — बालकाण्डधनुष-भंग कहाँ हुआ?जनकपुर (मिथिला) की रंगभूमि (यज्ञशाला/सभा-मण्डप) में। जनक ने विवाह-यज्ञ की रंगभूमि सजवाई, वहीं शिवजी का धनुष रखा, वहीं रामजी ने तोड़ा।#बालकाण्ड#धनुष भंग स्थान#जनकपुर
रामचरितमानस — बालकाण्डसीता-राम का प्रथम मिलन कहाँ हुआ?जनकपुर की पुष्पवाटिका (राजकीय बाग) में। रामजी फूल लेने आये, सीताजी गिरिजा पूजन के लिये। 'सिय मुख ससि भए नयन चकोरा' — दोनों ने एक-दूसरे को पहली बार देखा।#बालकाण्ड#प्रथम मिलन स्थान#पुष्पवाटिका
रामचरितमानस — बालकाण्डराजा जनक और राजा दशरथ का मिलन कैसा था?अत्यन्त प्रेमपूर्ण — जनक ने भव्य स्वागत किया, प्रेम से गले लगे। 'इन्ह कै प्रीति परसपर पावनि। कहि न जाइ मन भाव सुहावनि' — पवित्र प्रीति वाणी से कही नहीं जा सकती। जनक ने कहा — ब्रह्म-जीव जैसा स्वाभाविक प्रेम।#बालकाण्ड#जनक दशरथ मिलन#प्रेम
रामचरितमानस — बालकाण्डजनकपुर में बारात का स्वागत कैसे हुआ?भव्य स्वागत — नगर सजा, तोरण-पताकाएँ। दशरथ-जनक का प्रेमपूर्ण मिलन। रामजी का विवाह-श्रृंगार — मोर-कण्ठ-सी कान्ति, पीताम्बर, विवाह आभूषण। सब मंगल सुहावने।#बालकाण्ड#बारात स्वागत#जनकपुर
रामचरितमानस — बालकाण्डदशरथ की बारात कैसी थी — जनकपुर कैसे पहुँची?अत्यन्त भव्य बारात — वसिष्ठजी, मुनि, ब्राह्मण, सेना, हाथी-घोड़े-रथ सजे-धजे। नगाड़े-मंगलगान। शिवजी ने देवताओं को समझाया, नन्दी आगे बढ़ाया। दशरथ प्रसन्न-पुलकित। शिवजी रामरूप देख-देख सजल नेत्र हुए।#बालकाण्ड#दशरथ बारात#जनकपुर
रामचरितमानस — बालकाण्डजनकपुर की स्त्रियों ने श्रीरामजी के लिये सीताजी से विवाह की कामना क्यों की?रामजी को सीताजी का सबसे योग्य वर माना — अनुपम सौन्दर्य, दोनों एक दूसरे के योग्य, विधाता का उचित फल। स्त्रियों ने कहा — 'जोगु जानकिहि यह बरु अहई' — यह विवाह हो तो सब कृतार्थ होंगे।#बालकाण्ड#विवाह कामना#स्त्रियाँ
रामचरितमानस — बालकाण्डजनकपुर में श्रीरामजी को देखकर नगरवासियों ने क्या-क्या कहा?नगरवासी मुग्ध हुए — (1) जानकी के योग्य वर, (2) विधाता मिलायें तो सब कृतार्थ, (3) शंकर धनुष कठोर — चिन्ता, (4) रूप में अपार शक्ति, (5) इनका दर्शन पूर्वजन्म के पुण्य से ही मिलता है।#बालकाण्ड#नगरवासी#राम छबि
रामचरितमानस — बालकाण्डजनकपुर में सीताजी की किस प्रसिद्धि का वर्णन है?सीताजी अनुपम सौन्दर्य, शील और सुलक्षणों से प्रसिद्ध थीं। नारदजी ने 'सारे जगत में पूज्य' कहा था। सखियाँ उनकी शोभा देखकर अपने-आपको भूल जातीं। जनकपुर की स्त्रियाँ रामजी से उनके विवाह की कामना करती थीं।#बालकाण्ड#सीता प्रसिद्धि#जनकपुर
रामचरितमानस — बालकाण्ड'श्याम गौर किमि कहौं बखानी' — यह किसका वर्णन है?श्रीरामजी (श्याम/साँवले) और लक्ष्मणजी (गौर/गोरे) की जोड़ी का वर्णन। 'सोभा सीवँ सुभग दोउ बीरा। नील पीत जलजाभ सरीरा' — दोनों शोभा की सीमा, नील-पीत कमल समान शरीर, मोरपंख सिर पर। यह मानस में राम-लक्ष्मण की प्रसिद्ध उपाधि है।#बालकाण्ड#श्याम गौर#राम लक्ष्मण
रामचरितमानस — बालकाण्डश्रीराम-लक्ष्मण ने जनकपुर में प्रवेश करते समय नगर का क्या वर्णन किया?राजा का सुन्दर बाग देखा — वसन्त ऋतु छायी, मनोहर वृक्ष, रंग-बिरंगी लताओं के मण्डप, कोयल-तोते-मोर, मणियों की सीढ़ियों वाला सरोवर, निर्मल जल, कमल और भँवरे।#बालकाण्ड#जनकपुर#नगर वर्णन
रामचरितमानस — बालकाण्डश्रीराम-लक्ष्मण जनकपुर में किसके अतिथि बने?विश्वामित्रजी के साथ राजा जनक के अतिथि बने। जनक ने आदर-सत्कार किया, भोजन करवाया, आवास दिया। नगरवासी और स्त्रियाँ राम-लक्ष्मण की शोभा देखकर मुग्ध हुए।#बालकाण्ड#राम लक्ष्मण#जनकपुर
रामचरितमानस — बालकाण्डजनकपुर में राजा जनक ने विश्वामित्रजी का कैसे स्वागत किया?जनक ने ब्राह्मणों के साथ आकर दण्डवत किया, आसन दिया, चरण पखारे, भोजन करवाया। रामजी को देखकर मुग्ध हो गये — 'जनु चकोर पूरन ससि लोभा' — जैसे चकोर पूर्ण चन्द्रमा देखकर लुभा जाये।#बालकाण्ड#जनक#विश्वामित्र स्वागत
रामचरितमानस — बालकाण्डजनकपुर किसकी राजधानी थी?जनकपुर राजा जनक (विदेह/मिथिलेश) की राजधानी थी। जनक विदेह वंश के प्रतापी, विरक्त राजा थे। सीताजी उन्हीं की पुत्री थीं — इसीलिये 'जानकी' और 'वैदेही' कहलाती हैं।#बालकाण्ड#जनकपुर#राजा जनक
रामचरितमानस — बालकाण्डविश्वामित्रजी श्रीराम-लक्ष्मण को लेकर कहाँ गये?जनकपुर (मिथिला/विदेहनगर) — जहाँ राजा जनक का धनुष-यज्ञ होने वाला था। मार्ग में गंगा-स्नान किया, विश्वामित्रजी ने गंगावतरण की कथा सुनाई, फिर जनकपुर पहुँचे।#बालकाण्ड#जनकपुर#विश्वामित्र