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जनकपुर से जुड़े सभी प्रश्न(15)

जनकपुर पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 15 प्रश्न उपलब्ध हैं।

रामचरितमानस — बालकाण्ड

सीता-राम विवाह कहाँ हुआ?

जनकपुर (मिथिला) के भव्य विवाह-मण्डप में। चारों भाइयों का विवाह एक मण्डप में वेदविधि से। 'जसि बिबाह कै बिधि श्रुति गाई। महामुनिन्ह सो सब करवाई।'

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

धनुष-भंग कहाँ हुआ?

जनकपुर (मिथिला) की रंगभूमि (यज्ञशाला/सभा-मण्डप) में। जनक ने विवाह-यज्ञ की रंगभूमि सजवाई, वहीं शिवजी का धनुष रखा, वहीं रामजी ने तोड़ा।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

सीता-राम का प्रथम मिलन कहाँ हुआ?

जनकपुर की पुष्पवाटिका (राजकीय बाग) में। रामजी फूल लेने आये, सीताजी गिरिजा पूजन के लिये। 'सिय मुख ससि भए नयन चकोरा' — दोनों ने एक-दूसरे को पहली बार देखा।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

राजा जनक और राजा दशरथ का मिलन कैसा था?

अत्यन्त प्रेमपूर्ण — जनक ने भव्य स्वागत किया, प्रेम से गले लगे। 'इन्ह कै प्रीति परसपर पावनि। कहि न जाइ मन भाव सुहावनि' — पवित्र प्रीति वाणी से कही नहीं जा सकती। जनक ने कहा — ब्रह्म-जीव जैसा स्वाभाविक प्रेम।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

जनकपुर में बारात का स्वागत कैसे हुआ?

भव्य स्वागत — नगर सजा, तोरण-पताकाएँ। दशरथ-जनक का प्रेमपूर्ण मिलन। रामजी का विवाह-श्रृंगार — मोर-कण्ठ-सी कान्ति, पीताम्बर, विवाह आभूषण। सब मंगल सुहावने।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

दशरथ की बारात कैसी थी — जनकपुर कैसे पहुँची?

अत्यन्त भव्य बारात — वसिष्ठजी, मुनि, ब्राह्मण, सेना, हाथी-घोड़े-रथ सजे-धजे। नगाड़े-मंगलगान। शिवजी ने देवताओं को समझाया, नन्दी आगे बढ़ाया। दशरथ प्रसन्न-पुलकित। शिवजी रामरूप देख-देख सजल नेत्र हुए।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

जनकपुर की स्त्रियों ने श्रीरामजी के लिये सीताजी से विवाह की कामना क्यों की?

रामजी को सीताजी का सबसे योग्य वर माना — अनुपम सौन्दर्य, दोनों एक दूसरे के योग्य, विधाता का उचित फल। स्त्रियों ने कहा — 'जोगु जानकिहि यह बरु अहई' — यह विवाह हो तो सब कृतार्थ होंगे।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

जनकपुर में श्रीरामजी को देखकर नगरवासियों ने क्या-क्या कहा?

नगरवासी मुग्ध हुए — (1) जानकी के योग्य वर, (2) विधाता मिलायें तो सब कृतार्थ, (3) शंकर धनुष कठोर — चिन्ता, (4) रूप में अपार शक्ति, (5) इनका दर्शन पूर्वजन्म के पुण्य से ही मिलता है।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

जनकपुर में सीताजी की किस प्रसिद्धि का वर्णन है?

सीताजी अनुपम सौन्दर्य, शील और सुलक्षणों से प्रसिद्ध थीं। नारदजी ने 'सारे जगत में पूज्य' कहा था। सखियाँ उनकी शोभा देखकर अपने-आपको भूल जातीं। जनकपुर की स्त्रियाँ रामजी से उनके विवाह की कामना करती थीं।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

'श्याम गौर किमि कहौं बखानी' — यह किसका वर्णन है?

श्रीरामजी (श्याम/साँवले) और लक्ष्मणजी (गौर/गोरे) की जोड़ी का वर्णन। 'सोभा सीवँ सुभग दोउ बीरा। नील पीत जलजाभ सरीरा' — दोनों शोभा की सीमा, नील-पीत कमल समान शरीर, मोरपंख सिर पर। यह मानस में राम-लक्ष्मण की प्रसिद्ध उपाधि है।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

श्रीराम-लक्ष्मण ने जनकपुर में प्रवेश करते समय नगर का क्या वर्णन किया?

राजा का सुन्दर बाग देखा — वसन्त ऋतु छायी, मनोहर वृक्ष, रंग-बिरंगी लताओं के मण्डप, कोयल-तोते-मोर, मणियों की सीढ़ियों वाला सरोवर, निर्मल जल, कमल और भँवरे।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

श्रीराम-लक्ष्मण जनकपुर में किसके अतिथि बने?

विश्वामित्रजी के साथ राजा जनक के अतिथि बने। जनक ने आदर-सत्कार किया, भोजन करवाया, आवास दिया। नगरवासी और स्त्रियाँ राम-लक्ष्मण की शोभा देखकर मुग्ध हुए।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

जनकपुर में राजा जनक ने विश्वामित्रजी का कैसे स्वागत किया?

जनक ने ब्राह्मणों के साथ आकर दण्डवत किया, आसन दिया, चरण पखारे, भोजन करवाया। रामजी को देखकर मुग्ध हो गये — 'जनु चकोर पूरन ससि लोभा' — जैसे चकोर पूर्ण चन्द्रमा देखकर लुभा जाये।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

जनकपुर किसकी राजधानी थी?

जनकपुर राजा जनक (विदेह/मिथिलेश) की राजधानी थी। जनक विदेह वंश के प्रतापी, विरक्त राजा थे। सीताजी उन्हीं की पुत्री थीं — इसीलिये 'जानकी' और 'वैदेही' कहलाती हैं।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

विश्वामित्रजी श्रीराम-लक्ष्मण को लेकर कहाँ गये?

जनकपुर (मिथिला/विदेहनगर) — जहाँ राजा जनक का धनुष-यज्ञ होने वाला था। मार्ग में गंगा-स्नान किया, विश्वामित्रजी ने गंगावतरण की कथा सुनाई, फिर जनकपुर पहुँचे।

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