विस्तृत उत्तर
बालकाण्ड में सीताजी की प्रसिद्धि उनके अनुपम सौन्दर्य, शील और गुणों के कारण बताई गई है। जनकपुर में सीताजी को 'सब लच्छन संपन्न कुमारी' (सब सुलक्षणों से सम्पन्न) कहा गया। नारदजी ने पहले ही भविष्यवाणी की थी कि यह सारे जगत में पूज्य होगी।
जनकपुर की स्त्रियों ने कहा — 'देखि भानुकुलभूषनहि बिसरा सखिन्ह अपान' — सूर्यकुलके भूषण श्रीरामचन्द्रजीको देखकर सखियाँ अपने-आपको भूल गयीं।
सीताजी के सौन्दर्य का वर्णन — 'केहरि कटि पट पीत धर सुषमा सील निधान। देखि भानुकुलभूषनहि बिसरा सखिन्ह अपान' — सिंहकी-सी कमर, पीताम्बर, सुषमा और शील की निधान सीताजी को देखकर सखियाँ अपने-आपको भूल गयीं।
इस प्रकार सीताजी जनकपुर में सौन्दर्य, शील, गुण और पार्वती-कृपा के कारण प्रसिद्ध थीं।





