विस्तृत उत्तर
संत = हंस (विवेकी, दूध-पानी अलग करे), कमल (जल में अलिप्त), चन्दन (काटने पर भी सुगन्ध)। असंत = उल्लू (प्रकाश से भागे), जोंक (शोषक), कौआ (कपटी)। 'संत असंत सदा इसि करनी' — दोनों का आचरण सदा ऐसा ही रहता है।
संत = हंस, कमल, चन्दन। असंत = उल्लू, जोंक, कौआ। 'संत असंत सदा इसि करनी।'
संत = हंस (विवेकी, दूध-पानी अलग करे), कमल (जल में अलिप्त), चन्दन (काटने पर भी सुगन्ध)। असंत = उल्लू (प्रकाश से भागे), जोंक (शोषक), कौआ (कपटी)। 'संत असंत सदा इसि करनी' — दोनों का आचरण सदा ऐसा ही रहता है।
इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ
पौराणिक पर आपको रामचरितमानस — बालकाण्ड से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।