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उपमा प्रश्नोत्तरी — 9 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उपमा विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 9 प्रश्न

रामचरितमानस — बालकाण्ड

कलियुग की तुलना किससे की गई बालकाण्ड में?

कालनेमि (कपट की खान) — 'कालनेमि कलि कपट निधानू। नाम सुमति समरथ हनुमानू।' कलियुग में राम नाम ही एकमात्र आधार।

बालकाण्डकलियुगकालनेमि
रामचरितमानस — बालकाण्ड

संतों और असंतों का भेद किन उपमाओं से बताया गया बालकाण्ड में?

संत = हंस, कमल, चन्दन। असंत = उल्लू, जोंक, कौआ। 'संत असंत सदा इसि करनी।'

बालकाण्डसंत असंतहंस उल्लू
रामचरितमानस — बालकाण्ड

गुरु के चरणों की रज की तुलना किससे की गई बालकाण्ड में?

नेत्र का अंजन (काजल) और अमृत-मूल-चूर्ण — 'गुरु पद रज मृदु मंजुल अंजन। नयन लाइ देखिअ मन मंजन' — ज्ञान-दृष्टि देने वाला।

बालकाण्डगुरु चरण रजअंजन
रामचरितमानस — बालकाण्ड

तुलसीदासजी ने सत्संग की तुलना पारस पत्थर से क्यों की?

पारस लोहे को सोना बनाता — वैसे सत्संग अज्ञानी को ज्ञानी। 'बिनु सतसंग बिबेक न होई' — सत्संग बिना विवेक नहीं।

बालकाण्डसत्संगपारस
रामचरितमानस — बालकाण्ड

तुलसीदासजी ने मानस की तुलना किस सरोवर से की है?

रामचरितमानस की तुलना पवित्र मानसरोवर से की — चार संवाद = चार घाट, सात काण्ड = सात सीढ़ियाँ (सोपान), राम-सीता यश = अमृत जल, चौपाइयाँ = पुरइन (कमलिनी), छन्द-दोहा = कमल।

बालकाण्डमानस सरोवरउपमा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

खलों (दुष्टों) के स्वभाव की तुलना बालकाण्ड में किस-किस से की गई है?

खलों की तुलना — (1) ओलों से (दूसरों को नष्ट कर स्वयं भी नष्ट), (2) कालनेमि-रावण-राहु से (कपटी वेषधारी), (3) जोंक से (कमल-जोंक एक जल में पर गुण भिन्न), (4) उल्लू से (प्रकाश/सत्संग से कष्ट), (5) हज़ार मुखवाले से (दोष बखानने में)।

बालकाण्डखल स्वभावउपमा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

असंतों की तुलना तुलसीदासजी ने किससे की — कौन सा प्रसिद्ध दोहा है?

असंतों की तुलना ओलों से की (खेती नष्ट कर स्वयं भी गलते हैं), कालनेमि-रावण-राहु से की (वेष बनाते हैं पर कपट अन्त में खुल जाता है)। प्रसिद्ध दोहा — 'उदासीन अरि मीत हित सुनत जरहिं खल रीति' — दुष्ट किसी का भी हित सुनकर जलते हैं।

बालकाण्डअसंतखल स्वभाव
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'सठ सुधरहिं सत्संगति पाई। पारस परस कुधात सुहाई' — इसमें सत्संग की तुलना किससे की गई है?

सत्संग की तुलना पारस पत्थर से की गई है। जैसे पारस के स्पर्श से लोहा सोना बन जाता है, वैसे ही दुष्ट भी सत्संगति पाकर सुधर जाते हैं। सज्जन कुसंगति में भी साँप की मणि समान अपने गुण नहीं छोड़ते।

बालकाण्डसत्संगपारस
रामचरितमानस — बालकाण्ड

तुलसीदासजी ने गुरु की वन्दना में गुरु के चरणकमल की तुलना किससे की है?

तुलसीदासजी ने गुरु के चरणकमलों की तीन उपमाएँ दीं — (1) गुरु के वचनों को महामोह-अन्धकार नष्ट करने वाली सूर्य-किरणें, (2) गुरु के चरण-रज को संजीवनी जड़ी (अमृत मूल) का सुन्दर चूर्ण, और (3) गुरु के चरण-नखों को मणियों की ज्योति।

बालकाण्डगुरु वन्दनाचरणकमल

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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