विस्तृत उत्तर
बालकाण्ड में तुलसीदासजी ने खलों (दुष्टों) के स्वभाव की तुलना अनेक चीज़ों से की है:
- 1ओलों से — जैसे ओले खेतीका नाश करके आप भी गल जाते हैं, वैसे ही दुष्ट दूसरोंका काम बिगाड़नेके लिये अपना शरीरतक छोड़ देते हैं।
- 1कालनेमि, रावण और राहु से — वेषधारी ठग हैं, अच्छा वेष बनाकर वेषके प्रतापसे जगत पूजता है; परन्तु एक-न-एक दिन वे पौड़े आ ही जाते हैं, अन्ततक उनका कपट नहीं निभता।
- 1जोंक से — 'उपजहिं एक संग जग माहीं। जलज जोंक जिमि गुन बिलगाहीं॥' — संसार में संत-असंत एक साथ उत्पन्न होते हैं, पर जैसे कमल और जोंक एक ही जल में रहकर भिन्न गुण रखते हैं।
- 1उल्लू से — सत्संग में दुष्ट वैसे ही असहज होते हैं जैसे उल्लू को सूर्य का प्रकाश कष्ट देता है।
- 1शेषजी (हज़ार मुखवाले) से — दुष्ट हज़ार मुखोंसे दूसरों के दोषों का बड़े रोषके साथ वर्णन करते हैं।