विस्तृत उत्तर
रामजी सर्वशक्तिमान पर सबसे विनम्र: (1) धनुष तोड़ने से पहले गुरु-देवताओं को प्रणाम, (2) परशुरामजी से मृदु-विनीत वाणी — 'बालक बचनु करिअ नहिं काना', (3) सतीजी को हाथ जोड़कर प्रणाम, (4) विश्वामित्रजी की आज्ञा बिना अभिमान माने, (5) कौशल्या की प्रार्थना पर चतुर्भुज रूप छोड़ बालक बने। शिक्षा — सच्ची शक्ति विनम्रता में प्रकट, अभिमान में नहीं।





