विस्तृत उत्तर
परशुरामजी ने अपना वैष्णव धनुष (विष्णु का धनुष) श्रीरामजी को दिया।
चौपाई — 'राम रमापति कर धनु लेहू। खेंचहु मिटै मोर संदेहू। देत चापु आपुहिं चलि गयऊ। परसुराम मन बिसमय भयऊ' — (परशुरामजीने कहा —) हे राम! हे लक्ष्मीपति! धनुषको हाथमें लीजिये और इसे खींचिये, जिससे मेरा सन्देह मिट जाय। परशुरामजी धनुष देने लगे, तब वह आप ही चला गया (स्वयं रामजी के पास पहुँच गया)। तब परशुरामजीके मनमें बड़ा आश्चर्य हुआ।
इससे परशुरामजी को निश्चित हो गया कि ये साक्षात् भगवान विष्णु हैं — वैष्णव धनुष स्वयं भगवान के पास चला गया।





