विस्तृत उत्तर
बालकाण्ड में 'कृपासिंधु' (कृपा का समुद्र) मुख्यतः भगवान श्रीरामचन्द्रजी को कहा गया है। कई स्थानों पर यह उपाधि प्रयुक्त हुई:
- 1भगवान राम — 'कृपासिंधु बोले मृदु बचना' — कृपा के समुद्र भगवान कोमल वचन बोले (मनु-शतरूपा प्रसंग)।
- 2भगवान विष्णु — नारदजी ने भगवान को 'कृपानिधान' कहा।
- 3शिवजी — 'प्रभु आसुतोष कृपाल सिव' — शिवजी को भी कृपालु कहा (रति प्रसंग)।
पर सबसे अधिक बार 'कृपासिंधु' और 'कृपानिधि' श्रीरामजी के लिये प्रयुक्त हुआ — यह उनकी प्रमुख उपाधि है।





