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विस्तृत उत्तर
प्रतापभानु धर्मात्मा चक्रवर्ती थे पर कपटमुनि के जाल में फँसे — ब्राह्मण भोजन में माँस मिला — शाप: 'जाइ निसाचर होहु' — राक्षस (रावण) बने। शिक्षा: (1) बुरी संगति = विनाश, (2) ब्राह्मण अपमान कभी न करो, (3) अज्ञानतावश पाप भी फलता है, (4) धर्मात्मा भी कपट-जाल में फँस सकता।
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