विस्तृत उत्तर
पार्वतीजी ने हज़ारों वर्ष कठोर तप किया, सप्तर्षियों की परीक्षा में अडिग रहीं — 'जन्म कोटि लगि रगर हमारी। बरउँ संभु न त रहउँ कुआरी' — करोड़ जन्म हठ। ब्रह्मवाणी — 'अस तपु काहुँ न कीन्ह भवानी' — ऐसा तप किसीने नहीं। शिक्षा: लक्ष्य स्पष्ट हो तो बाधा नहीं, परीक्षा में दृढ़ रहो, असम्भव भी सम्भव।





