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विस्तृत उत्तर
नारदजी ने काम-विजय का अभिमान किया — परिणाम: (1) माया से मोहित, विवेक नष्ट, (2) वानर-मुख, जगत में उपहास, (3) स्वयंवर में अपमान, (4) क्रोध में भगवान को शाप = पाप, (5) अत्यन्त पश्चाताप। शिक्षा — सब उपलब्धि ईश्वर कृपा, अभिमान सबसे बड़ा शत्रु, शिवजी ने भी 'मद' को बड़ा दोष बताया।
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