विस्तृत उत्तर
तुलसीदासजी ने रामचरितमानस की तुलना एक पवित्र और सुन्दर मानसरोवर से की है और इस सरोवर के विभिन्न अंगों को कथा के विभिन्न तत्वों से जोड़ा।
दोहा — 'सुठि सुंदर संबाद बर बिरचे बुद्धि बिचारि। तेइ एहि पावन सुभग सर घाट मनोहर चारि॥'
इसका अर्थ — इस कथामें बुद्धिसे विचारकर जो चार अत्यन्त सुन्दर और उत्तम संवाद (भुशुण्डि-गरुड़, शिव-पार्वती, याज्ञवल्क्य-भरद्वाज और तुलसीदास-संत) रचे हैं, वही इस पवित्र और सुन्दर सरोवरके चार मनोहर घाट हैं।
आगे — 'सप्त प्रबंध सुभग सोपाना। ग्यान नयन निरखत मन माना॥' अर्थ — सात काण्ड ही इस मानस-सरोवरकी सुन्दर सात सीढ़ियाँ हैं, जिनको ज्ञानरूपी नेत्रोंसे देखते ही मन प्रसन्न हो जाता है।
श्रीराम-सीताजीका यश अमृतके समान जल, उपमाएँ तरंगें, सुन्दर चौपाइयाँ पुरइन (कमलिनी), छन्द-सोरठा-दोहा कमलकुल, और अर्थ-भाव-भाषा परागमकरन्द (पुष्परस) हैं।





