विस्तृत उत्तर
तुलसीदासजी ने असंतों (खलों/दुष्टों) की तुलना कई चीज़ों से की है। उनके बारे में प्रसिद्ध दोहा है —
उदासीन अरि मीत हित सुनत जरहिं खल रीति। जानि पानि जुग जोरि जन बिनती करइ सप्रीति॥
इसका अर्थ — दुष्टोंकी यह रीति है कि वे उदासीन, शत्रु अथवा मित्र — किसीका भी हित सुनकर जलते हैं।
इसके अलावा खलों के स्वभाव के कई लक्षण बताये:
- ▸उनको कठोर वचनरूपी वज्र सदा प्यारा लगता है
- ▸वे हज़ार आँखोंसे दूसरोंके दोषों को देखते हैं
- ▸जैसे ओले खेतीका नाश करके आप भी गल जाते हैं, वैसे ही दुष्ट दूसरोंका काम बिगाड़नेके लिये अपना शरीरतक छोड़ देते हैं
- ▸वे कालनेमि, रावण और राहु के समान होते हैं — वेष अच्छा बना लेते हैं पर अन्ततः कपट निभता नहीं
संक्षेप में — खल परकीय हित से जलते हैं, कठोर वचन पसन्द करते हैं और दूसरों के दोष खोजते रहते हैं।