विस्तृत उत्तर
राजा जनक और राजा दशरथ का मिलन अत्यन्त प्रेमपूर्ण और भावुक था। दोनों प्रतापी और धर्मात्मा राजा थे — एक-दूसरे का बड़ा सम्मान करते थे।
बालकाण्ड में वर्णन — जनक ने दशरथ का भव्य स्वागत किया, परस्पर मिले, प्रेम से गले लगे। दशरथ ने गुरु वसिष्ठजी, मुनिगण और सम्पूर्ण परिवार का परिचय कराया। जनक ने भी अपने कुटुम्ब और मन्त्रियों से मिलवाया।
दोनों राजाओं की प्रीति का वर्णन — 'इन्ह कै प्रीति परसपर पावनि। कहि न जाइ मन भाव सुहावनि' — इनकी आपसकी प्रीति बड़ी पवित्र और सुहावनी है, वाणीसे कही नहीं जा सकती। जनक ने कहा — 'सुनहु नाथ कह मुदित बिदेहू। ब्रह्म जीव इव सहज सनेहू' — सुनिये, ब्रह्म और जीवकी तरह इनमें स्वाभाविक प्रेम है।





