का सरल उत्तर
अत्यन्त प्रेमपूर्ण — जनक ने भव्य स्वागत किया, प्रेम से गले लगे। 'इन्ह कै प्रीति परसपर पावनि। कहि न जाइ मन भाव सुहावनि' — पवित्र प्रीति वाणी से कही नहीं जा सकती। जनक ने कहा — ब्रह्म-जीव जैसा स्वाभाविक प्रेम।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।