विस्तृत उत्तर
यह श्रीरामजी (श्याम वर्ण) और लक्ष्मणजी (गौर वर्ण) की जोड़ी का वर्णन है।
बालकाण्ड में दोनों भाइयों की शोभा का वर्णन अनेक स्थानों पर है — 'श्याम गौर सुंदर दोउ जोरी। निरखहिं छबि जननीं तृन तोरी' — श्याम और गौर शरीरवाली दोनों सुन्दर जोड़ियों की शोभा देखकर माताएँ तृण तोड़ती हैं (नज़र न लगे)।
पुष्पवाटिका प्रसंग में — 'सोभा सीवँ सुभग दोउ बीरा। नील पीत जलजाभ सरीरा। मोरपंख सिर सोहत नीके। गुच्छ बीच बिच कुसुम कली के॥'
अर्थ — दोनों सुन्दर भाई शोभाकी सीमा हैं। उनके शरीरकी आभा नीले और पीले कमलकी-सी है। सिरपर सुन्दर मोरपंख सुशोभित हैं। उनके बीच-बीचमें फूलोंकी कलियोंके गुच्छे लगे हैं।
इस प्रकार 'श्याम गौर' रामचरितमानस में राम-लक्ष्मण की प्रसिद्ध उपाधि है — श्याम (साँवले) राम और गौर (गोरे) लक्ष्मण।





