स्तोत्र ज्ञानहनुमान चालीसा की सबसे शक्तिशाली चौपाई?सबसे प्रचलित: 'भूत पिशाच निकट नहिं आवै'(भय नाश)। 'नासै रोग हरै सब पीरा'(रोग)। 'बुद्धिहीन तनु जानिके'(बुद्धि)। 'संकट कटै मिटै'(संकट)। सबसे शक्तिशाली=जो मन स्पर्श करे।#हनुमान चालीसा#शक्तिशाली#चौपाई
रामचरितमानस — बालकाण्ड'होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा' — अर्थ?जो राम ने रचा वही होगा, तर्क से क्या? शिवजी ने सतीजी को कहा। शिक्षा — ईश्वर की योजना सर्वोपरि।#बालकाण्ड#राम रचि राखा#भाग्य
रामचरितमानस — बालकाण्डरामचरितमानस में मुख्य छन्द कौन से हैं?मुख्य छन्द — (1) चौपाई (सर्वाधिक, कथा वाहक), (2) दोहा (सार-संक्षेप), (3) सोरठा (दोहे का उल्टा), (4) छन्द (विशेष अवसरों पर, गेय), (5) श्लोक (संस्कृत, मंगलाचरण)। चौपाई-दोहा मिलकर कथा चलती है।#बालकाण्ड#छन्द प्रकार#चौपाई
रामचरितमानस — बालकाण्ड'कलपभेद हरिचरित सुहाए। भाँति अनेक मुनीसन्ह गाए' — इसका क्या मतलब है?अर्थ — हर कल्प (ब्रह्मा के दिन) में भगवान की लीला भिन्न होती है, इसलिये मुनियों ने अनेक प्रकार से हरिचरित गाये हैं। इसमें संदेह न करें, प्रेमसे सुनें। वाल्मीकि, तुलसी आदि की रामकथाओं में अन्तर इसी कल्पभेद के कारण है।#बालकाण्ड#कल्पभेद#हरिचरित
रामचरितमानस — बालकाण्डरामकथा को 'सौ करोड़ अपारा' क्यों कहा गया?'नाना भाँति राम अवतारा। रामायन सत कोटि अपारा॥' — भगवान राम अनन्त अवतार लेते हैं, हर कल्प में भिन्न-भिन्न लीला होती है, इसलिये रामायणें सौ करोड़ और उससे भी अपार (अनगिनत) हैं। राम अनन्त, गुण अनन्त, कथा विस्तार असीम।#बालकाण्ड#रामकथा अनन्त#सत कोटि
रामचरितमानस — बालकाण्ड'रामचरितमानस एहि नामा। सुनत श्रवन पाइअ बिश्रामा' — इसका अर्थ क्या है?अर्थ — इसका नाम 'रामचरितमानस' है, जिसके कानों से सुनते ही शान्ति (विश्राम) मिलती है। विषय-तापसे जलता मनरूपी हाथी इस मानसरूपी सरोवर में आकर सुखी हो जाता है।#बालकाण्ड#मानस नामकरण#चौपाई
रामचरितमानस — बालकाण्ड'नौमी भौम बार मधुमासा। अवधपुरीं यह चरित प्रकासा' — इसका अर्थ क्या है?अर्थ — चैत्र मास (मधुमास) की नवमी तिथि, मंगलवार (भौम बार) को अयोध्यापुरी (अवधपुरी) में यह चरित्र (रामचरितमानस) प्रकाशित हुआ। यही रामनवमी का दिन है जब भगवान राम का जन्म हुआ था।#बालकाण्ड#रचना तिथि#अयोध्या
रामचरितमानस — बालकाण्ड'संबत सोरह सै एकतीसा। करउँ कथा हरि पद धरि सीसा' — इसमें कौन सा संवत है?संवत् 1631 (1574 ईस्वी)। 'सोरह सै' = 1600, 'एकतीसा' = 31, कुल = 1631। अर्थ — संवत् 1631 में श्रीहरि के चरणों पर सिर रखकर कथा आरम्भ करता हूँ।#बालकाण्ड#संवत 1631#चौपाई
रामचरितमानस — बालकाण्ड'राम चरित जे सुनहिं सुनावहिं' — ऐसे लोगों को क्या फल मिलता है?जो रामचरित स्नेहसहित कहते-सुनते हैं वे राम चरणों में अनुरागी होंगे, कलियुग के सब पापों से मुक्त और शुभ भाग्यवाले होंगे। रामचरितमानस सुनने से शान्ति मिलती है और विषयरूपी दावानल में जलता मन सुखी हो जाता है।#बालकाण्ड#रामचरित#श्रवण फल
रामचरितमानस — बालकाण्ड'अगुन सगुन दुइ ब्रह्म सरूपा' — इसका क्या अर्थ है?अर्थ — निर्गुण (निराकार) और सगुण (साकार) दोनों ब्रह्म के ही स्वरूप हैं। दोनों अकथनीय, अगाध, अनादि और अनुपम हैं। तुलसीदासजी ने दोनों को एक ही ब्रह्म के दो पहलू बताकर निर्गुण-सगुण विवाद का समाधान किया।#बालकाण्ड#निर्गुण सगुण#ब्रह्म
रामचरितमानस — बालकाण्ड'राम भगति मनि उर बस जाके' — राम भक्ति की तुलना किससे की गई?राम भक्ति की तुलना मणि (रत्न) से की गई है। अर्थ — जिसके हृदय में रामभक्तिरूपी मणि बसी है, उसको स्वप्न में भी रत्तीभर दुख नहीं होता।#बालकाण्ड#राम भक्ति#मणि उपमा
रामचरितमानस — बालकाण्ड'जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी' — चार प्रकार के भक्त कौन हैं?चार प्रकार के भक्त हैं — (1) अर्थार्थी (धन चाहने वाले), (2) आर्त (संकट निवृत्ति चाहने वाले), (3) जिज्ञासु (भगवान को जानने वाले), (4) ज्ञानी (तत्त्व से जानकर प्रेम से भजने वाले)। चारों को नाम का आधार है, पर ज्ञानी भक्त प्रभु को विशेष प्रिय हैं।#बालकाण्ड#चार प्रकार भक्त#नाम महिमा
रामचरितमानस — बालकाण्ड'बिधि हरि हर कबि कोबिद बानी। कहत साधु महिमा सकुचानी' — इसका क्या तात्पर्य है?तात्पर्य — संतों की महिमा इतनी अपार है कि ब्रह्मा, विष्णु, शिव, कवि और पण्डितों की वाणी भी उसे कहने में सकुचाती है। तुलसीदासजी ने कहा — जैसे सब्ज़ी बेचने वाला मणियों के गुण नहीं बता सकता, वैसे ही मुझसे यह महिमा कही नहीं जाती।#बालकाण्ड#संत महिमा#ब्रह्मा-विष्णु-शिव
रामचरितमानस — बालकाण्डतुलसीदासजी ने सत्संग की महिमा में क्या कहा — 'बिनु सत्संग विवेक न होई' का क्या अर्थ है?अर्थ — सत्संग के बिना विवेक नहीं होता और राम की कृपा के बिना सत्संग सहज में नहीं मिलता। सत्संगति आनन्द और कल्याण की जड़ है — सत्संग की प्राप्ति ही फल है और बाकी सब साधन फूल हैं।#बालकाण्ड#सत्संग#विवेक
रामचरितमानस — बालकाण्ड'बालमीक नारद घटजोनी' — यहाँ घटजोनी कौन हैं?'घटजोनी' मुनि अगस्त्यजी हैं। उनका जन्म कलश (घड़े) से हुआ था इसलिये उन्हें 'घटजोनी' या 'कुम्भज' कहते हैं। इस चौपाई में वाल्मीकिजी, नारदजी और अगस्त्यजी तीनों का उल्लेख है।#बालकाण्ड#अगस्त्य मुनि#घटजोनी
रामचरितमानस — बालकाण्ड'श्रीगुर पद नख मनि गन जोती। सुमिरत दिव्य दृष्टि हियँ होती' — इसका क्या अर्थ है?अर्थ — श्रीगुरु के चरण-नखों की ज्योति मणियों के प्रकाश समान है, जिसके स्मरण करते ही हृदय में दिव्य दृष्टि उत्पन्न हो जाती है। यह प्रकाश अज्ञान रूपी अन्धकार का नाश करता है और जिसके हृदय में आ जाये उसके बड़े भाग्य हैं।#बालकाण्ड#गुरु वन्दना#चौपाई
भक्ति साहित्यतुलसीदास की चौपाई में क्या शक्ति हैतुलसीदास की चौपाइयों में मंत्र-शक्ति, लयात्मक छंद, जीवन-दर्शन और राम-नाम का तेज एकसाथ है। सुंदरकाण्ड का नित्य पाठ संकट-नाशक और मन को शांत करने वाला माना जाता है।#तुलसीदास#रामचरितमानस#चौपाई