विस्तृत उत्तर
इस चौपाई में राम भक्ति की तुलना मणि (रत्न) से की गई है जो हृदय में बसी हो।
पूरी चौपाई — 'राम भगति मनि उर बस जाके। दुख लवलेस न सपनेहुँ ताके॥'
इसका अर्थ — रामभक्तिरूपी मणि जिसके हृदयमें बसी हुई है, उसको स्वप्नमें भी लवलेश (रत्तीभर) दुःख नहीं होता।
जैसे मणि (रत्न) अमूल्य होती है और उसे धारण करने वाले को सब प्रकार की समृद्धि और सुरक्षा मिलती है, वैसे ही जिसके हृदय में रामभक्तिरूपी मणि विराजमान है, उसे संसार का कोई दुख छू नहीं सकता — स्वप्न में भी नहीं।





