विस्तृत उत्तर
तुलसीदास (1532-1623) रचित रामचरितमानस की चौपाइयाँ केवल काव्य नहीं — ये जीवित मंत्र हैं। इनकी शक्ति का अनुभव करोड़ों भक्त प्रतिदिन करते हैं।
तुलसीदास की चौपाइयों में शक्ति के मूल कारण —
पहली शक्ति — मंत्र-स्वरूप। तुलसीदास ने रामचरितमानस को राम-नाम के मंत्र-बीजों से रचा है। इसमें 'राम', 'सीता', 'हनुमान' जैसे नाम बार-बार आते हैं जो प्रत्येक उच्चारण में दिव्य ऊर्जा का संचार करते हैं।
दूसरी शक्ति — गेयता और लय। चौपाई की छंद-संरचना ऐसी है कि पढ़ते ही मस्तिष्क एक विशेष आवृत्ति पर आ जाता है। 'मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सुदसरथ अजर बिहारी' — यह पंक्ति पढ़ते ही मन में एक विशेष शांति और उत्साह आता है।
तीसरी शक्ति — जीवन-दर्शन। प्रत्येक चौपाई में जीवन की किसी न किसी समस्या का उत्तर छिपा है। संकट में, दुःख में, अनिश्चय में — रामचरितमानस खोलने पर उचित मार्गदर्शन मिलता है।
चौथी शक्ति — सुंदरकाण्ड की विशेष महिमा। सुंदरकाण्ड का पाठ विशेष रूप से संकट-नाशक माना जाता है। 'जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर' — इसका पाठ मात्र वातावरण को बदल देता है।
पाँचवीं शक्ति — भाषाई सौंदर्य। अवधी की मधुरता में लिखी इन चौपाइयों का संगीत ही इतना शक्तिशाली है कि बिना अर्थ जाने भी ये हृदय को प्रभावित करती हैं।





