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रामचरितमानस — बालकाण्ड⏱ 1 मिनट पठन

'जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी'

इस चौपाई में संकटसे घबराये हुए (आर्त) भक्तों का उल्लेख है जो नामजप करते हैं और उनके बड़े-भारी कुसंकट मिट जाते हैं।

संक्षिप्त उत्तर

चार प्रकार के भक्त हैं — (1) अर्थार्थी (धन चाहने वाले), (2) आर्त (संकट निवृत्ति चाहने वाले), (3) जिज्ञासु (भगवान को जानने वाले), (4) ज्ञानी (तत्त्व से जानकर प्रेम से भजने वाले)। चारों को नाम का आधार है, पर ज्ञानी भक्त प्रभु को विशेष प्रिय हैं।

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विस्तृत उत्तर

इस चौपाई में संकटसे घबराये हुए (आर्त) भक्तों का उल्लेख है जो नामजप करते हैं और उनके बड़े-भारी कुसंकट मिट जाते हैं।

आगे की चौपाई में चार प्रकार के रामभक्त बताये गये — 'राम भगत जग चारि प्रकारा। सुकृती चारिउ अनघ उदारा॥'

इसका अर्थ — जगतमें चार प्रकारके रामभक्त हैं और चारों ही पुण्यात्मा, पापरहित और उदार हैं।

गीता प्रेस की टीका के अनुसार ये चार प्रकार हैं:

  1. 1अर्थार्थी — धनादिकी चाहसे भजनेवाले
  2. 2आर्त — संकटकी निवृत्तिके लिये भजनेवाले
  3. 3जिज्ञासु — भगवान्को जाननेकी इच्छासे भजनेवाले
  4. 4ज्ञानी — भगवान्को तत्त्वसे जानकर स्वाभाविक ही प्रेमसे भजनेवाले

आगे कहा — 'चहु चतुर कहुँ नाम अधारा। ग्यानी प्रभुहि बिसेषि पिआरा॥' अर्थ — चारों ही चतुर भक्तोंको नामका ही आधार है; इनमें ज्ञानी भक्त प्रभुको विशेषरूपसे प्रिय हैं।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

'जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी' — चार प्रकार के भक्त कौन हैं को संदर्भ सहित समझें

'जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी' — चार प्रकार के भक्त कौन हैं का सबसे सीधा सार यह है: चार प्रकार के भक्त हैं — (1) अर्थार्थी (धन चाहने वाले), (2) आर्त (संकट निवृत्ति चाहने वाले), (3) जिज्ञासु (भगवान को जानने वाले), (4) ज्ञानी (तत्त्व से जानकर...

रामचरितमानस — बालकाण्ड जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.

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रामचरितमानस — बालकाण्ड प्रश्नोत्तर
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