विस्तृत उत्तर
इस चौपाई में संकटसे घबराये हुए (आर्त) भक्तों का उल्लेख है जो नामजप करते हैं और उनके बड़े-भारी कुसंकट मिट जाते हैं।
आगे की चौपाई में चार प्रकार के रामभक्त बताये गये — 'राम भगत जग चारि प्रकारा। सुकृती चारिउ अनघ उदारा॥'
इसका अर्थ — जगतमें चार प्रकारके रामभक्त हैं और चारों ही पुण्यात्मा, पापरहित और उदार हैं।
गीता प्रेस की टीका के अनुसार ये चार प्रकार हैं:
- 1अर्थार्थी — धनादिकी चाहसे भजनेवाले
- 2आर्त — संकटकी निवृत्तिके लिये भजनेवाले
- 3जिज्ञासु — भगवान्को जाननेकी इच्छासे भजनेवाले
- 4ज्ञानी — भगवान्को तत्त्वसे जानकर स्वाभाविक ही प्रेमसे भजनेवाले
आगे कहा — 'चहु चतुर कहुँ नाम अधारा। ग्यानी प्रभुहि बिसेषि पिआरा॥' अर्थ — चारों ही चतुर भक्तोंको नामका ही आधार है; इनमें ज्ञानी भक्त प्रभुको विशेषरूपसे प्रिय हैं।





