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नाम महिमा से जुड़े सभी प्रश्न(8)

नाम महिमा पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 8 प्रश्न उपलब्ध हैं।

नाम महिमा एवं भक्ति

कृष्ण नाम जपने से क्या विशेष लाभ है

कृष्ण नाम कलियुग का विशेष उपहार है। कलिसंतरणोपनिषद् का हरे कृष्ण महामंत्र कलियुग की सर्वोत्तम साधना है। कृष्ण आनंदस्वरूप हैं, अतः उनका नाम मन में दिव्य आनंद का प्रवाह लाता है। पद्मपुराण में इसके जप से गोलोक की प्राप्ति बताई गई है।

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नाम महिमा एवं भक्ति

राम नाम में कितनी शक्ति है

राम नाम 'तारक मंत्र' है — शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव स्वयं काशी में मृत्यु के समय राम-नाम सुनाते हैं। तुलसीदास कहते हैं — यह चारों युगों में और तीनों लोकों में जीव को शोकमुक्त करता है। एक 'राम' में विष्णु के हजार नामों का फल समाहित है।

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नाम महिमा एवं भक्ति

भगवान का नाम लेने मात्र से पाप कैसे कटते हैं

श्रीमद्भागवत के अनुसार भगवान का नाम जान-बूझकर या अनजाने में — किसी भी भाव से लिया जाए — पाप नष्ट होते हैं, क्योंकि नाम और नामी (भगवान) अलग नहीं हैं। नाम-उच्चारण से भाव-शुद्धि होती है जिससे पाप-प्रवृत्ति का क्षय होता है।

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पुराण माहात्म्य

भवानीपति कौन हैं?

भवानीपति भगवान शिव का एक नाम है, जिसका अर्थ है भवानी यानी देवी पार्वती के पति। भवानी का अर्थ है पार्वती, और पति का अर्थ है स्वामी। स्कन्द पुराण के नागर खण्ड में कहा गया है कि द्वितीया श्राद्ध करने से भगवान भवानीपतिरीश्वरः यानी भवानी के पति ईश्वर शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं, और श्राद्धकर्ता को कैलास धाम तथा विपुल सम्पदा प्रदान करते हैं।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

रामचरितमानस में राम नाम की महिमा कितने दोहों/छन्दों में वर्णित है?

बालकाण्ड में नाम महिमा का वर्णन दोहा 19 से 27-28 तक लगभग 8-10 दोहों और दर्जनों चौपाइयों में फैला हुआ है। इसमें नाम के दो अक्षर, शिवजी का जप, वाल्मीकि का उद्धार, कलियुग में नाम का एकमात्र आधार होना आदि अनेक पक्ष बताये गये।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

'जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी' — चार प्रकार के भक्त कौन हैं?

चार प्रकार के भक्त हैं — (1) अर्थार्थी (धन चाहने वाले), (2) आर्त (संकट निवृत्ति चाहने वाले), (3) जिज्ञासु (भगवान को जानने वाले), (4) ज्ञानी (तत्त्व से जानकर प्रेम से भजने वाले)। चारों को नाम का आधार है, पर ज्ञानी भक्त प्रभु को विशेष प्रिय हैं।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

तुलसीदासजी ने राम नाम को निर्गुण और सगुण दोनों से कैसे बड़ा बताया?

तुलसीदासजी ने कहा कि राम नाम निर्गुण और सगुण दोनों के बीच 'सुन्दर साक्षी' और 'चतुर दुभाषिया' है — दोनों का ज्ञान कराने वाला। रूप नाम के अधीन है, नाम के बिना रूप का ज्ञान नहीं हो सकता।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

रामचरितमानस में 'राम' नाम को किन दो अक्षरों का बताया गया है?

'राम' नाम दो अक्षरों — 'र' और 'म' का है। ये दो अक्षर अग्नि, सूर्य और चन्द्रमा के बीजरूप हैं तथा ब्रह्मा, विष्णु और शिव — तीनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। तुलसीदासजी ने इन्हें सावन-भादों के दो महीनों की उपमा दी।

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