विस्तृत उत्तर
रामचरितमानस के बालकाण्ड में राम नाम की महिमा का वर्णन अत्यन्त विस्तृत है। श्रीनाम वन्दना और नाम महिमा का प्रकरण दोहा संख्या 19 से लेकर दोहा संख्या 27-28 तक चलता है — यह लगभग पृष्ठ 40 से 49 तक फैला हुआ है।
इसमें तुलसीदासजी ने राम नाम की महिमा के अनेक पक्ष बताये:
- ▸नाम के दो अक्षर 'र' और 'म' अग्नि, सूर्य, चन्द्र के बीज हैं
- ▸नाम ब्रह्मा, विष्णु, शिव तीनों का स्वरूप है
- ▸शिवजी स्वयं इस महामंत्र का जप करते हैं
- ▸एक राम नाम सहस्र नामों के समान है
- ▸वाल्मीकिजी उलटा नाम जपकर पवित्र हो गये
- ▸नाम निर्गुण-सगुण के बीच दुभाषिये के समान है
- ▸कलियुग में नाम ही एकमात्र आधार है
- ▸नाम कलियुगरूपी कालनेमि को मारने वाला हनुमान है
- ▸राम ने शबरी, जटायु आदि सेवकों को मुक्ति दी, पर नाम ने अगणित दुष्टों का उद्धार किया
इस प्रकार लगभग 8-10 दोहों और उनके बीच की दर्जनों चौपाइयों में नाम महिमा का विस्तृत वर्णन है।





