विस्तृत उत्तर
रामचरितमानस के बालकाण्ड में तुलसीदासजी ने 'राम' नाम को दो अक्षरों — 'र' और 'म' का बताया है।
चौपाई है — 'बंदउँ नाम राम रघुबर को। हेतु कृसानु भानु हिमकर को॥ बिधि हरि हरमय बेद प्रान सो। अगुन अनूपम गुन निधान सो॥'
इसका अर्थ — मैं श्रीरघुनाथजीके नाम 'राम' की वन्दना करता हूँ, जो कृशानु (अग्नि), भानु (सूर्य) और हिमकर (चन्द्रमा) का हेतु अर्थात् 'र' 'आ' और 'म' रूपसे बीज है। वह 'राम' नाम ब्रह्मा, विष्णु और शिवरूप है। वह वेदोंका प्राण है; निर्गुण, उपमारहित और गुणोंका भण्डार है।
आगे दोहे में कहा — 'बरषा रितु रघुपति भगति तुलसी सालि सुदास। राम नाम बर बरन जुग सावन भादव मास॥' अर्थ — श्रीरघुनाथजीकी भक्ति वर्षा-ऋतु है और 'राम' नामके दो सुन्दर अक्षर सावन-भादोंके महीने हैं।
इस प्रकार 'र' और 'म' — ये दो अक्षर अग्नि, सूर्य और चन्द्रमा के बीज हैं तथा ब्रह्मा, विष्णु और शिव तीनों का प्रतिनिधित्व करते हैं।





