विस्तृत उत्तर
कृष्ण नाम को कलियुग का विशेष उपहार माना गया है। जब द्वापर के अंत में कृष्ण ने अवतार लिया, उनके जाने के बाद कलियुग का आरंभ हुआ और उनका नाम जगत में शेष रह गया — इसे 'कृष्ण का उपहार' कहते हैं।
कृष्ण नाम का अर्थ और शक्ति — 'कृष्ण' शब्द 'कृष्' धातु से बना है जिसका अर्थ है 'आकर्षित करना'। सम्पूर्ण सृष्टि को आकर्षित करने वाले वे 'कृष्ण' हैं। भागवत के अनुसार — 'आनन्दैकसुखस्वामी श्याम: कमललोचन:' — जो आनंद के एकमात्र स्वामी हैं, वे कृष्ण हैं।
हरे कृष्ण महामंत्र — कलिसंतरणोपनिषद् में 'हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे॥' इस षोडश-नाम महामंत्र को कलियुग में सर्वोत्तम साधन कहा गया है। श्री चैतन्य महाप्रभु ने इसे सर्वत्र प्रचारित किया।
कृष्ण नाम के विशेष लाभ — श्रीमद्भागवत के अनुसार कृष्ण नाम जपने से मन में दिव्य आनंद का अनुभव होता है, क्योंकि कृष्ण स्वयं आनंदस्वरूप हैं। उनका नाम आनंद का प्रवाह मन में लाता है। राधारानी सहित कृष्ण नाम — 'राधे कृष्ण' का जप दोनों की संयुक्त शक्ति का आह्वान है।
पद्मपुराण में कहा गया है — जो नित्य हरे कृष्ण महामंत्र का जप करते हैं उन्हें गोलोक धाम की प्राप्ति होती है।





