विस्तृत उत्तर
राम नाम की अपराजेय शक्ति दिखाने वाला सबसे प्रसिद्ध प्रसंग वह है जब हनुमानजी ने स्वयं श्रीराम को परास्त कर दिया।
कथा — एक बार विश्वामित्र ऋषि ने श्रीराम से एक दुष्ट राजा को मारने का वचन लिया। राजा ने हनुमानजी की शरण ली। हनुमानजी ने उस राजा को सलाह दी कि वह 'जय जय सियाराम' का जाप करता रहे। श्रीराम आए और उन्होंने शक्तिबाण छोड़ा — परंतु वह राजा को छू भी नहीं सका क्योंकि वह राम-नाम जप रहा था। श्रीराम स्वयं चाहकर भी राम-नाम जपने वाले को नहीं मार सकते थे। तब ऋषि विश्वामित्र ने कहा — 'जो बल राम के नाम में है, वह खुद राम में नहीं है।'
यह प्रसंग स्पष्ट करता है — नाम नामी से भी बड़ा होता है। नाम में अनंत शक्ति समाहित है क्योंकि नाम असंख्य जनों की भक्ति और श्रद्धा से निर्मित होता है।
हनुमानजी की छाती में राम — एक अन्य प्रसंग में जब हनुमानजी ने अपनी छाती चीरकर दिखाई तो उसमें सीता-राम का दर्शन था। यह दर्शाता है कि हनुमानजी का समस्त अस्तित्व राम-नाम में रचा-बसा है — इसीलिए उनका नाम और राम का नाम, दोनों एक ही शक्ति के स्रोत बन जाते हैं।





