विस्तृत उत्तर
सूर्यदेव को प्रत्यक्ष देव कहा जाता है — वे एकमात्र देवता हैं जिन्हें हम नेत्रों से देख सकते हैं। उनका नाम जपने से आत्म-तेज, स्वास्थ्य और बुद्धि-तेज में वृद्धि होती है।
आदित्य हृदयम् — वाल्मीकि रामायण के युद्धकाण्ड में अगस्त्य ऋषि ने श्रीराम को 'आदित्य हृदयम्' स्तोत्र सुनाया था जब वे युद्ध में थके हुए थे। सूर्य के नामों के इस स्तोत्र के पाठ से श्रीराम में नया तेज और शक्ति का संचार हुआ और वे रावण को परास्त करने में सफल हुए।
सूर्य के बारह नाम — सूर्य के बारह नाम हैं — आदित्य, सूर्य, भास्कर, दिवाकर, भानु, अर्क, विवस्वान, सवितृ, हिरण्यरेता, विष्णु, अंशुमान, मार्तंड। इनमें से प्रत्येक नाम एक विशेष शक्ति का द्योतक है।
सूर्य नाम का विज्ञान — सूर्योदय के समय सूर्य के नामों का जप करने से शरीर में विटामिन D का उत्पादन बढ़ता है, ओज और तेज बढ़ता है। सूर्य नमस्कार के साथ सूर्य मंत्र 'ॐ सूर्याय नमः' का जप विशेष प्रभावकारी है।
सूर्य जप के फल — सूर्य को नेत्र-रोगों का निवारक, स्वास्थ्यदाता और ज्ञान-प्रकाशक माना गया है। 'ॐ आदित्याय नमः' या 'ॐ सूर्याय नमः' का प्रतिदिन प्रातःकाल 108 बार जप तेज, ओज और आत्मशक्ति बढ़ाता है।





