विस्तृत उत्तर
स्वर्लोक के मूल निवासी 33 कोटि (प्रकार) के मुख्य देवता हैं। इनमें 12 आदित्य, 8 वसु, 11 रुद्र और 2 अश्विनी कुमार शामिल हैं। 12 आदित्य सूर्य के बारह स्वरूप हैं जो बारह महीनों में विभिन्न नामों से जाने जाते हैं। 8 वसु वे देवता हैं जो विभिन्न प्राकृतिक तत्वों के अधिष्ठाता हैं। 11 रुद्र भगवान शिव के ग्यारह स्वरूप हैं। 2 अश्विनी कुमार देवताओं के चिकित्सक हैं जो अत्यंत सुंदर और तेजस्वी हैं। इनके अतिरिक्त अग्नि, वायु, वरुण, यम, कुबेर आदि अष्ट-दिक्पाल भी स्वर्ग के प्रमुख देवता हैं जो मानसोत्तर और सुमेरु पर्वत की दिशाओं में स्थित अपनी-अपनी स्वर्ण राजधानियों में निवास करते हैं। देवताओं का शरीर पंचभौतिक नहीं होता बल्कि सात्त्विक ऊर्जा से निर्मित 'भोग-देह' होता है।
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