हनुमान (रुद्रावतार) के मंत्र
परिचय:
पवनपुत्र हनुमान जी को भगवान शिव का ग्यारहवां रुद्रावतार माना जाता है। वे शक्ति, भक्ति, बुद्धि, और निस्वार्थ सेवा के प्रतीक हैं। उनके शिव अंश होने के कारण उनके कुछ मंत्रों में रुद्र की शक्ति का स्पष्ट आह्वान होता है।
रुद्र हनुमान मंत्र
अर्थ:
"हे रुद्र के अवतार हनुमान, हे रामदूत, आपको नमस्कार है। आप हमारे सभी शत्रुओं का संहार करें, सभी रोगों को दूर करें और सभी को वशीभूत करने की शक्ति प्रदान करें।" 30
लाभ:
इस मंत्र के जाप से सभी प्रकार के शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, असाध्य रोग भी दूर होते हैं, वशीकरण शक्ति प्राप्त होती है तथा जीवन की बाधाओं और कठिनाइयों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है।
अल्पज्ञात रुद्र रूप मंत्र
महत्व:
यह मंत्र सीधे हनुमान जी के "रुद्रात्मकाय" अर्थात रुद्र स्वरूप को इंगित करता है। "हुं फट" जैसे बीज अक्षरों का प्रयोग इसे अधिक तांत्रिक और उग्र प्रकृति का बनाता है, जो विशेष सिद्धियों या शत्रु नाश जैसे तीव्र कार्यों के लिए प्रयुक्त हो सकता है। यह मंत्र सामान्य भक्ति मंत्रों से भिन्न है और अल्पज्ञात है।
यद्यपि हनुमान जी की उपासना के अनेक मंत्र जनसामान्य में प्रचलित हैं, तथापि उनके "रुद्रावतार" स्वरूप को विशेष रूप से संबोधित करने वाले मंत्र, जैसे कि ऊपर वर्णित हैं, उनके शिव अंश और प्रचंड शक्ति को उजागर करते हैं। ये मंत्र सामान्य भक्तिपूर्ण स्तुतियों से अधिक गहन और विशिष्ट फलदायक हो सकते हैं, और इसी कारण कुछ साधकों के मध्य ही सीमित रहते हैं।






