विस्तृत उत्तर
हनुमान हवन शक्ति, साहस, भय निवारण, शत्रु नाश, मंगल दोष शांति और सर्वविध रक्षा के लिए किया जाता है।
हनुमान हवन विधि
1. शुभ दिन: मंगलवार या शनिवार। हनुमान जयंती (चैत्र पूर्णिमा) विशेष।
2. संकल्प: भय निवारण, शत्रु शांति, मंगल शांति, स्वास्थ्य — यथोचित संकल्प।
3. हनुमान प्रतिमा स्थापना: हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र। सिन्दूर, चमेली तेल, लाल पुष्प से पूजन।
1मंत्र जप
- ▸हनुमान बीज मंत्र: 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः हनुमते नमः।'
- ▸या 'ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोगहराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।'
5. हवन सामग्री: शमी की समिधा, घी, लाल चन्दन, गुग्गुल, सिन्दूर मिश्रित घी, तिल, जौ।
6. हनुमान चालीसा आहुति: प्रत्येक चौपाई पर एक आहुति — कुल 40 आहुतियाँ (या इसके गुणज)।
7. सुन्दरकाण्ड पाठ: हवन के साथ या पूर्व में सुन्दरकाण्ड का पाठ।
8. बजरंग बाण: विशेष शत्रु नाश और रक्षा हेतु।
9. दान: सिन्दूर, चमेली तेल, लाल वस्त्र, बूँदी लड्डू, गुड़, केला।
विशेष प्रयोग
- ▸भूत-प्रेत भय में हनुमान हवन अत्यंत प्रभावी माना जाता है।
- ▸शनि दोष शांति में भी हनुमान हवन सहायक — क्योंकि हनुमान जी ने शनिदेव को बंधन से मुक्त किया था।
- ▸न्यायालय/कानूनी विवाद में 'ॐ नमो हनुमते...' मंत्र सहित हवन।





