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हवन विधि📜 हनुमान चालीसा, सुन्दरकाण्ड, रामचरितमानस, हनुमान अष्टक2 मिनट पठन

हनुमान हवन कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

हनुमान हवन: मंगलवार/शनिवार → सिन्दूर-तेल पूजन → 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं...' जप → शमी समिधा-गुग्गुल हवन → चालीसा प्रति चौपाई आहुति (40) → सुन्दरकाण्ड → बजरंग बाण → दान (सिन्दूर, तेल, लड्डू)। भय-शत्रु-शनि शांति।

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विस्तृत उत्तर

हनुमान हवन शक्ति, साहस, भय निवारण, शत्रु नाश, मंगल दोष शांति और सर्वविध रक्षा के लिए किया जाता है।

हनुमान हवन विधि

1. शुभ दिन: मंगलवार या शनिवार। हनुमान जयंती (चैत्र पूर्णिमा) विशेष।

2. संकल्प: भय निवारण, शत्रु शांति, मंगल शांति, स्वास्थ्य — यथोचित संकल्प।

3. हनुमान प्रतिमा स्थापना: हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र। सिन्दूर, चमेली तेल, लाल पुष्प से पूजन।

1मंत्र जप

  • हनुमान बीज मंत्र: 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः हनुमते नमः।'
  • या 'ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोगहराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।'

5. हवन सामग्री: शमी की समिधा, घी, लाल चन्दन, गुग्गुल, सिन्दूर मिश्रित घी, तिल, जौ।

6. हनुमान चालीसा आहुति: प्रत्येक चौपाई पर एक आहुति — कुल 40 आहुतियाँ (या इसके गुणज)।

7. सुन्दरकाण्ड पाठ: हवन के साथ या पूर्व में सुन्दरकाण्ड का पाठ।

8. बजरंग बाण: विशेष शत्रु नाश और रक्षा हेतु।

9. दान: सिन्दूर, चमेली तेल, लाल वस्त्र, बूँदी लड्डू, गुड़, केला।

विशेष प्रयोग

  • भूत-प्रेत भय में हनुमान हवन अत्यंत प्रभावी माना जाता है।
  • शनि दोष शांति में भी हनुमान हवन सहायक — क्योंकि हनुमान जी ने शनिदेव को बंधन से मुक्त किया था।
  • न्यायालय/कानूनी विवाद में 'ॐ नमो हनुमते...' मंत्र सहित हवन।
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शास्त्रीय स्रोत
हनुमान चालीसा, सुन्दरकाण्ड, रामचरितमानस, हनुमान अष्टक
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