विस्तृत उत्तर
प्रातःकाल में सूर्य का प्राधान्य होता है। प्रातःकालीन मुख्य आहुतियों के मंत्र इस प्रकार हैं:
— 'ॐ सूर्यो ज्योतिर्ज्योतिः सूर्यः स्वाहा॥' (सूर्य ही ज्योति है, और ज्योति ही सूर्य है)
— 'ॐ सूर्यो वर्चो ज्योतिर्वर्चः स्वाहा॥'
— 'ॐ ज्योतिः सूर्यः सूर्यो ज्योतिः स्वाहा॥' (यह मंत्र प्रायः मौन रहकर दिया जाता है क्योंकि यह प्रथम मंत्र की ही पुनरावृत्ति है)
— 'ॐ सजूर्देवेन सवित्रा सजूरुषसेन्द्रवत्या। जुषाणः सूर्यो वेतु स्वाहा॥' (अर्थ: देव रूपी परमात्मा द्वारा उत्पन्न सूर्य, जो उषा काल के साथ मिलकर सबको प्रकाश देता है, वह मेरी आहुति को प्रेमपूर्वक ग्रहण करे)।





