विस्तृत उत्तर
विष्णु यज्ञ (नारायण हवन) भगवान विष्णु/नारायण की प्रसन्नता, सुख-समृद्धि, रक्षा और मोक्ष प्राप्ति के लिए किया जाता है।
विष्णु यज्ञ की विधि
1. शुभ समय: गुरुवार, एकादशी, कार्तिक मास, देवशयनी/देवउठनी एकादशी।
2. संकल्प: विष्णु प्रीत्यर्थम्, लक्ष्मी प्राप्ति, कार्य सिद्धि — यथोचित संकल्प।
3. विष्णु प्रतिमा/शालिग्राम स्थापना: पीले वस्त्र पर शालिग्राम या विष्णु प्रतिमा। तुलसी पत्र, पीले पुष्प, चन्दन से पूजन।
4. षोडशोपचार पूजन: पुरुष सूक्त के 16 मंत्रों से विष्णु का षोडशोपचार पूजन।
1मंत्र जप
- ▸विष्णु बीज: 'ॐ नमो नारायणाय' (अष्टाक्षर मंत्र) — यह सबसे प्रसिद्ध विष्णु मंत्र है।
- ▸'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' (द्वादशाक्षर मंत्र)।
6. हवन सामग्री: पीपल की समिधा, घी, तुलसी पत्र, पीले तिल, चावल, खीर, पीले पुष्प, कमल गट्टा।
7. आहुतियाँ: पुरुष सूक्त या विष्णु सहस्रनाम के प्रत्येक नाम पर एक आहुति (1,000 या अधिक)। 'ॐ नमो नारायणाय स्वाहा' सहित।
8. विशेष पाठ: विष्णु सहस्रनाम, श्री सूक्त (लक्ष्मी प्राप्ति), पुरुष सूक्त, नारायण सूक्त।
9. पूर्णाहुति: नारियल, खीर, पंचामृत, तुलसी, पीले पुष्प सहित।
10. दान: पीले वस्त्र, चने की दाल, हल्दी, केला, सोना (यथाशक्ति), तुलसी माला, गाय दान।
विशेष: सत्यनारायण पूजा विष्णु यज्ञ का सबसे सरल और प्रचलित रूप है। लक्ष्मी-नारायण हवन धन-समृद्धि के लिए विशेष प्रभावी माना जाता है।





