विस्तृत उत्तर
सामान्य देव-यज्ञ में गायत्री मंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात स्वाहा) से विशेष आहुतियां कम से कम 11 या 21 बार दी जाती हैं, जिससे बुद्धि का परिष्कार और दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
हवन में गायत्री मंत्र की आहुति: कम से कम 11 या 21 बार। मंत्र: 'ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात स्वाहा।' फल: बुद्धि का परिष्कार और दीर्घायु की प्राप्ति।
सामान्य देव-यज्ञ में गायत्री मंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात स्वाहा) से विशेष आहुतियां कम से कम 11 या 21 बार दी जाती हैं, जिससे बुद्धि का परिष्कार और दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ
पौराणिक पर आपको हवन विधि से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।