विस्तृत उत्तर
घृत की प्रारंभिक आहुतियों के बाद, अग्नि के अत्यधिक ताप को नियंत्रित करने, आसुरी शक्तियों के प्रवेश को रोकने तथा देव शक्तियों से यज्ञ की स्वीकृति प्राप्त करने के लिए कुंड के चारों ओर जल का सिंचन किया जाता है, जिसे जलप्रोक्षण कहते हैं।
जलप्रोक्षण के तीन कारण: (1) अग्नि के अत्यधिक ताप को नियंत्रित करना, (2) आसुरी शक्तियों के प्रवेश को रोकना, (3) देव शक्तियों से यज्ञ की स्वीकृति प्राप्त करना। कुंड के चारों ओर जल सिंचन।
घृत की प्रारंभिक आहुतियों के बाद, अग्नि के अत्यधिक ताप को नियंत्रित करने, आसुरी शक्तियों के प्रवेश को रोकने तथा देव शक्तियों से यज्ञ की स्वीकृति प्राप्त करने के लिए कुंड के चारों ओर जल का सिंचन किया जाता है, जिसे जलप्रोक्षण कहते हैं।
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