विस्तृत उत्तर
सायंकाल में सूर्य छिप जाता है, अतः अग्नि का प्राधान्य होता है। सायंकालीन मुख्य आहुतियों के मंत्र इस प्रकार हैं:
— 'ॐ अग्निर्ज्योतिर्ज्योतिरग्निः स्वाहा॥'
— 'ॐ अग्निर्वर्चो ज्योतिर्वर्चः स्वाहा॥'
— 'ॐ अग्निर्ज्योतिर्ज्योतिरग्निः स्वाहा॥' (मौन रहकर)
— 'ॐ सजूर्देवेन सवित्र सजू रात्र्येन्द्रवत्या। जुषाणो अग्निर्वेतु स्वाहा॥'





