विस्तृत उत्तर
जलप्रोक्षण में विभिन्न दिशाओं में जल छिड़कते हुए निम्नलिखित देवों का आवाहन किया जाता है:
पूर्व दिशा में (बाएँ से दाएँ जल छिड़कते हुए): 'ॐ अदितेऽनुमन्यस्व' — हे अखंड सत्तामयी अदिति! हमें इस यज्ञ की अनुमति प्रदान करें।
पश्चिम दिशा में (दाएँ से बाएँ): 'ॐ अनुमतेऽनुमन्यस्व' — हे ईश्वरीय कृपा रूपी अनुमति देवी! इस कार्य के लिए अपनी स्वीकृति दें।
उत्तर दिशा में (दाएँ से बाएँ): 'ॐ सरस्वत्यनुमन्यस्व' — हे ज्ञान की देवी सरस्वती! हमें इस यज्ञ का विज्ञान समझने की अनुमति दें।
कुंड के चारों ओर (एक पूर्ण वृत्त में जल घुमाते हुए): 'ॐ देव सवितः प्र सुव यज्ञं प्र सुव यज्ञपतिं भगाय...' — हे सविता देव! हमारे इस यज्ञ को और यजमान को ऐश्वर्य की ओर प्रेरित करें।
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